01सेलम, वेदारण्यम और मद्रास
चक्रवर्ती राजगोपालाचारी का जन्म होसुर के पास थोरापल्ली में एक श्रीवैष्णव परिवार में हुआ और उन्होंने सेलम में वकालत की, जहाँ 1917 में नगरपालिका के अध्यक्ष बने। 1919 में वे गांधीजी से जुड़े और उनके निकटतम सहयोगियों में रहे; उनकी पुत्री का विवाह गांधीजी के पुत्र देवदास से हुआ। अप्रैल 1930 में उन्होंने तिरुचिरापल्ली से समुद्र तट पर वेदारण्यम तक नमक यात्रा का नेतृत्व किया और वहीं गिरफ़्तार हुए। 1937 से 1939 तक मद्रास प्रेसीडेंसी के प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने सेलम ज़िले से आरंभ करके मद्यनिषेध लागू किया और 1939 का मंदिर प्रवेश प्राधिकार एवं क्षतिपूर्ति अधिनियम पारित कराया; उसी वर्ष 8 जुलाई को हरिजनों ने मदुरै के मीनाक्षी मंदिर में प्रवेश किया।
02गवर्नर-जनरल और इतिहास-ग्रंथ
21 जून 1948 को माउंटबेटन के बाद वे गवर्नर-जनरल बने, यह पद पाने वाले एकमात्र भारतीय, और 26 जनवरी 1950 को गणराज्य बनने तक रहे। बाद में वे केंद्रीय गृह मंत्री और मद्रास के मुख्यमंत्री (1952–54) रहे, और 1959 में स्वतंत्र पार्टी बनाई। 1954 में भारत रत्न पाने वाले पहले तीन लोगों में वे थे। भारतीय विद्या भवन के लिए उन्होंने सरल अंग्रेज़ी में महाभारत (1951) और रामायण (1957) फिर से कही, और ये छोटी पुस्तकें आज भी छपती हैं; उनकी तमिल रामायण ‘चक्रवर्ती तिरुमगन्’ को 1958 में साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। उन्होंने तमिल भक्ति गीत ‘कुऱै ओन्ऱुम् इल्लै’ लिखा, जिसे एम. एस. सुब्बुलक्ष्मी ने घर-घर पहुँचाया। 25 दिसंबर 1972 को मद्रास में उनका देहांत हुआ।


