नवम मण्डल

सूक्त 77: कृशानु का बाण, फिर भी श्येन उड़ा

ऋषि: कविर्भार्गवः · देवता: पवमानः सोमः · छन्द: जगती

5 श्लोक · 77 में से 114

इस अध्याय में क्या होता है

कृशानु का बाण, फिर भी श्येन उड़ा

कवि भार्गव पाँच जगती मन्त्रों में पवमान सोम का गान करते हैं। मधुमय सोम कोश में गर्जता है, वह इन्द्र का वज्र है, सुन्दरों से भी सुन्दर; ऋत की दुग्धवती धाराएँ रंभाती गौओं की भाँति आती हैं। वह पुरातन सोम है जिसे श्येन ने प्रेरित होकर अन्तरिक्ष पार द्युलोक से छीना, धनुर्धर कृशानु से मन में काँपते हुए। आगे और पीछे के सभी बिन्दुओं से गौओं वाले महान धन हेतु बहने की प्रार्थना है। सोम गौओं के बाड़े में प्रवेश करता है और झुण्ड में अश्व की भाँति हिनहिनाता है, यज्ञ के योग्य मित्र।

77.1

ए॒ष प्र कोशे॒ मधु॑माँ अचिक्रद॒दिन्द्र॑स्य॒ वज्रो॒ वपु॑षो॒ वपु॑ष्टरः ।
अ॒भीमृ॒तस्य॑ सु॒दुघा॑ घृत॒श्चुतो॑ वा॒श्रा अ॑र्षन्ति॒ पय॑सेव धे॒नव॑ः

eṣa pra kośe madhumām̐ acikradadindrasya vajro vapuṣo vapuṣṭaraḥ |
abhīmṛtasya sudughā ghṛtaścuto vāśrā arṣanti payaseva dhenavaḥ

77.2

स पू॒र्व्यः प॑वते॒ यं दि॒वस्परि॑ श्ये॒नो म॑था॒यदि॑षि॒तस्ति॒रो रज॑ः ।
स मध्व॒ आ यु॑वते॒ वेवि॑जान॒ इत्कृ॒शानो॒रस्तु॒र्मन॒साह॑ बि॒भ्युषा॑

sa pūrvyaḥ pavate yaṃ divaspari śyeno mathāyadiṣitastiro rajaḥ |
sa madhva ā yuvate vevijāna itkṛśānorasturmanasāha bibhyuṣā

77.3

ते न॒ः पूर्वा॑स॒ उप॑रास॒ इन्द॑वो म॒हे वाजा॑य धन्वन्तु॒ गोम॑ते ।
ई॒क्षे॒ण्या॑सो अ॒ह्यो॒३॒॑ न चार॑वो॒ ब्रह्म॑ब्रह्म॒ ये जु॑जु॒षुर्ह॒विर्ह॑विः

te naḥ pūrvāsa uparāsa indavo mahe vājāya dhanvantu gomate |
īkṣeṇyāso ahyo na cāravo brahmabrahma ye jujuṣurhavirhaviḥ

77.4

अ॒यं नो॑ वि॒द्वान्व॑नवद्वनुष्य॒त इन्दु॑ः स॒त्राचा॒ मन॑सा पुरुष्टु॒तः ।
इ॒नस्य॒ यः सद॑ने॒ गर्भ॑माद॒धे गवा॑मुरु॒ब्जम॒भ्यर्ष॑ति व्र॒जम्

ayaṃ no vidvānvanavadvanuṣyata induḥ satrācā manasā puruṣṭutaḥ |
inasya yaḥ sadane garbhamādadhe gavāmurubjamabhyarṣati vrajam

77.5

चक्रि॑र्दि॒वः प॑वते॒ कृत्व्यो॒ रसो॑ म॒हाँ अद॑ब्धो॒ वरु॑णो हु॒रुग्य॒ते ।
असा॑वि मि॒त्रो वृ॒जने॑षु य॒ज्ञियोऽत्यो॒ न यू॒थे वृ॑ष॒युः कनि॑क्रदत्

cakrirdivaḥ pavate kṛtvyo raso mahām̐ adabdho varuṇo hurugyate |
asāvi mitro vṛjaneṣu yajñiyo'tyo na yūthe vṛṣayuḥ kanikradat

पाठ का स्रोत: Wikisource · CC BY-SA 4.0 (Wikisource transcription of a public-domain text)