नवम मण्डल

सूक्त 4: हमें श्रेष्ठतर बनाओ: याचना की टेक

ऋषि: हिरण्यस्तूप आङ्गिरसः · देवता: पवमानः सोमः · छन्द: गायत्री

10 श्लोक · 4 में से 114

इस अध्याय में क्या होता है

हमें श्रेष्ठतर बनाओ: याचना की टेक

हिरण्यस्तूप आङ्गिरस गायत्री छन्द में पवमान सोम की स्तुति करते हैं, और हर मन्त्र एक ही टेक पर समाप्त होता है, 'अथा नो वस्यसस्कृधि', अर्थात 'और हमें श्रेष्ठतर बनाओ'। सोम से प्रार्थना है कि वह महान यश जीते और दे, ज्योति, स्वर्लोक, सब सौभाग्य, दक्षता और संकल्प दे, तथा शत्रुओं को दूर मारे। पवित्र करने वालों से कहा गया है कि वे इन्द्र के पान के लिए सोम को शुद्ध करें। सोम की कृपा से स्तोता चिरकाल तक सूर्य को देखना चाहते हैं। वे दोहरा धन, युद्धों में विजय, और अश्वों से युक्त, पूर्ण आयु तक टिकने वाली अद्भुत सम्पदा माँगते हैं।

4.1

सना॑ च सोम॒ जेषि॑ च॒ पव॑मान॒ महि॒ श्रव॑ः ।
अथा॑ नो॒ वस्य॑सस्कृधि

sanā ca soma jeṣi ca pavamāna mahi śravaḥ |
athā no vasyasaskṛdhi

4.2

सना॒ ज्योति॒ः सना॒ स्व१॒॑र्विश्वा॑ च सोम॒ सौभ॑गा ।
अथा॑ नो॒ वस्य॑सस्कृधि

sanā jyotiḥ sanā svarviśvā ca soma saubhagā |
athā no vasyasaskṛdhi

4.3

सना॒ दक्ष॑मु॒त क्रतु॒मप॑ सोम॒ मृधो॑ जहि ।
अथा॑ नो॒ वस्य॑सस्कृधि

sanā dakṣamuta kratumapa soma mṛdho jahi |
athā no vasyasaskṛdhi

4.4

पवी॑तारः पुनी॒तन॒ सोम॒मिन्द्रा॑य॒ पात॑वे ।
अथा॑ नो॒ वस्य॑सस्कृधि

pavītāraḥ punītana somamindrāya pātave |
athā no vasyasaskṛdhi

4.5

त्वं सूर्ये॑ न॒ आ भ॑ज॒ तव॒ क्रत्वा॒ तवो॒तिभि॑ः ।
अथा॑ नो॒ वस्य॑सस्कृधि

tvaṃ sūrye na ā bhaja tava kratvā tavotibhiḥ |
athā no vasyasaskṛdhi

4.6

तव॒ क्रत्वा॒ तवो॒तिभि॒र्ज्योक्प॑श्येम॒ सूर्य॑म् ।
अथा॑ नो॒ वस्य॑सस्कृधि

tava kratvā tavotibhirjyokpaśyema sūryam |
athā no vasyasaskṛdhi

4.7

अ॒भ्य॑र्ष स्वायुध॒ सोम॑ द्वि॒बर्ह॑सं र॒यिम् ।
अथा॑ नो॒ वस्य॑सस्कृधि

abhyarṣa svāyudha soma dvibarhasaṃ rayim |
athā no vasyasaskṛdhi

4.8

अ॒भ्य१॒॑र्षान॑पच्युतो र॒यिं स॒मत्सु॑ सास॒हिः ।
अथा॑ नो॒ वस्य॑सस्कृधि

abhyarṣānapacyuto rayiṃ samatsu sāsahiḥ |
athā no vasyasaskṛdhi

4.9

त्वां य॒ज्ञैर॑वीवृध॒न्पव॑मान॒ विध॑र्मणि ।
अथा॑ नो॒ वस्य॑सस्कृधि

tvāṃ yajñairavīvṛdhanpavamāna vidharmaṇi |
athā no vasyasaskṛdhi

4.10

र॒यिं न॑श्चि॒त्रम॒श्विन॒मिन्दो॑ वि॒श्वायु॒मा भ॑र ।
अथा॑ नो॒ वस्य॑सस्कृधि

rayiṃ naścitramaśvinamindo viśvāyumā bhara |
athā no vasyasaskṛdhi

पाठ का स्रोत: Wikisource · CC BY-SA 4.0 (Wikisource transcription of a public-domain text)