नवम मण्डल

सूक्त 31: सोम के लिए बहती वायु और नदियाँ

ऋषि: गोतमो राहूगणः · देवता: पवमानः सोमः · छन्द: गायत्री

6 श्लोक · 31 में से 114

इस अध्याय में क्या होता है

सोम के लिए बहती वायु और नदियाँ

गोतम राहूगण गायत्री छन्द में पवमान सोम की स्तुति करते हैं। निचोड़ी हुई बूँदें ज्ञानवान और पवित्र होकर आगे बढ़ती हैं और ऐसा धन लाती हैं जो चित्त को जगाता है। सोम से प्रार्थना है कि वे द्युलोक और पृथिवी पर तेज बढ़ाने वाले और बल के स्वामी बनें। उनके लिए वायु बहती है, नदियाँ दौड़ती हैं। ऊँचे शिखर पर विराजे पिंगल सोम के लिए गौएँ अक्षय घृत और दूध दुहती हैं। चारों ओर से उनमें वीर्य एकत्र हो। अन्त में ऋषि भुवन के इस सुशस्त्र स्वामी की मित्रता माँगते हैं।

31.1

प्र सोमा॑सः स्वा॒ध्य१॒॑ः पव॑मानासो अक्रमुः ।
र॒यिं कृ॑ण्वन्ति॒ चेत॑नम्

pra somāsaḥ svādhyaḥ pavamānāso akramuḥ |
rayiṃ kṛṇvanti cetanam

31.2

दि॒वस्पृ॑थि॒व्या अधि॒ भवे॑न्दो द्युम्न॒वर्ध॑नः ।
भवा॒ वाजा॑नां॒ पति॑ः

divaspṛthivyā adhi bhavendo dyumnavardhanaḥ |
bhavā vājānāṃ patiḥ

31.3

तुभ्यं॒ वाता॑ अभि॒प्रिय॒स्तुभ्य॑मर्षन्ति॒ सिन्ध॑वः ।
सोम॒ वर्ध॑न्ति ते॒ मह॑ः

tubhyaṃ vātā abhipriyastubhyamarṣanti sindhavaḥ |
soma vardhanti te mahaḥ

31.4

आ प्या॑यस्व॒ समे॑तु ते वि॒श्वत॑ः सोम॒ वृष्ण्य॑म् ।
भवा॒ वाज॑स्य संग॒थे

ā pyāyasva sametu te viśvataḥ soma vṛṣṇyam |
bhavā vājasya saṃgathe

31.5

तुभ्यं॒ गावो॑ घृ॒तं पयो॒ बभ्रो॑ दुदु॒ह्रे अक्षि॑तम् ।
वर्षि॑ष्ठे॒ अधि॒ सान॑वि

tubhyaṃ gāvo ghṛtaṃ payo babhro duduhre akṣitam |
varṣiṣṭhe adhi sānavi

31.6

स्वा॒यु॒धस्य॑ ते स॒तो भुव॑नस्य पते व॒यम् ।
इन्दो॑ सखि॒त्वमु॑श्मसि

svāyudhasya te sato bhuvanasya pate vayam |
indo sakhitvamuśmasi

पाठ का स्रोत: Wikisource · CC BY-SA 4.0 (Wikisource transcription of a public-domain text)