उप॑ नः सु॒तमा ग॑हि॒ सोम॑मिन्द्र॒ गवा॑शिरम् ।
हरि॑भ्यां॒ यस्ते॑ अस्म॒युः
upa naḥ sutamā gahi somamindra gavāśiram |
haribhyāṃ yaste asmayuḥ
ऋषि: गाथिनो विश्वामित्रः · देवता: इन्द्रः · छन्द: गायत्री
9 श्लोक · 42 में से 62
दूध मिले सोम के लिए इन्द्र को बुलाने वाले विश्वामित्र के नौ गायत्री मन्त्र। इन्द्र अपने हरि घोड़ों के साथ पत्थरों से निचोड़े और बर्हि पर रखे रस तक आए, क्योंकि उसे पीकर उसे तृप्ति मिलती है। ऋषि की स्तुतियाँ उसे सोमपान की ओर मोड़ने गई हैं। शतक्रतु से निचोड़े गए सोमों को उदर में धारण करने को कहा गया है। गायक उसे धन जीतने वाला और संग्रामों में साहसी जानते हैं, और उसकी कृपा चाहते हैं। वह दूध और जौ मिला, वृषभों द्वारा निचोड़ा सोम पिए। रक्षा चाहने वाले कुशिक प्राचीन इन्द्र को सोमपान के लिए पुकारते हैं।
उप॑ नः सु॒तमा ग॑हि॒ सोम॑मिन्द्र॒ गवा॑शिरम् ।
हरि॑भ्यां॒ यस्ते॑ अस्म॒युः
upa naḥ sutamā gahi somamindra gavāśiram |
haribhyāṃ yaste asmayuḥ
तमि॑न्द्र॒ मद॒मा ग॑हि बर्हि॒ःष्ठां ग्राव॑भिः सु॒तम् ।
कु॒विन्न्व॑स्य तृ॒प्णव॑ः
tamindra madamā gahi barhiḥṣṭhāṃ grāvabhiḥ sutam |
kuvinnvasya tṛpṇavaḥ
इन्द्र॑मि॒त्था गिरो॒ ममाच्छा॑गुरिषि॒ता इ॒तः ।
आ॒वृते॒ सोम॑पीतये
indramitthā giro mamācchāguriṣitā itaḥ |
āvṛte somapītaye
इन्द्रं॒ सोम॑स्य पी॒तये॒ स्तोमै॑रि॒ह ह॑वामहे ।
उ॒क्थेभि॑ः कु॒विदा॒गम॑त्
indraṃ somasya pītaye stomairiha havāmahe |
ukthebhiḥ kuvidāgamat
इन्द्र॒ सोमा॑ः सु॒ता इ॒मे तान्द॑धिष्व शतक्रतो ।
ज॒ठरे॑ वाजिनीवसो
indra somāḥ sutā ime tāndadhiṣva śatakrato |
jaṭhare vājinīvaso
वि॒द्मा हि त्वा॑ धनंज॒यं वाजे॑षु दधृ॒षं क॑वे ।
अधा॑ ते सु॒म्नमी॑महे
vidmā hi tvā dhanaṃjayaṃ vājeṣu dadhṛṣaṃ kave |
adhā te sumnamīmahe
इ॒ममि॑न्द्र॒ गवा॑शिरं॒ यवा॑शिरं च नः पिब ।
आ॒गत्या॒ वृष॑भिः सु॒तम्
imamindra gavāśiraṃ yavāśiraṃ ca naḥ piba |
āgatyā vṛṣabhiḥ sutam
तुभ्येदि॑न्द्र॒ स्व ओ॒क्ये॒३॒॑ सोमं॑ चोदामि पी॒तये॑ ।
ए॒ष रा॑रन्तु ते हृ॒दि
tubhyedindra sva okye somaṃ codāmi pītaye |
eṣa rārantu te hṛdi
त्वां सु॒तस्य॑ पी॒तये॑ प्र॒त्नमि॑न्द्र हवामहे ।
कु॒शि॒कासो॑ अव॒स्यव॑ः
tvāṃ sutasya pītaye pratnamindra havāmahe |
kuśikāso avasyavaḥ
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