इ॒मां ख॑ना॒म्योष॑धिं वी॒रुधं॒ बल॑वत्तमाम् ।
यया॑ स॒पत्नीं॒ बाध॑ते॒ यया॑ संवि॒न्दते॒ पति॑म्
imāṃ khanāmyoṣadhiṃ vīrudhaṃ balavattamām |
yayā sapatnīṃ bādhate yayā saṃvindate patim
ऋषि: इन्द्राणी · देवता: सपत्नीबाधनम्( उपनिषत्) · छन्द: अनुष्टुप्, ६ पङ्क्तिः
6 श्लोक · 145 में से 191
ऋषि इन्द्राणी हैं और अनुक्रमणी विषय को सपत्नी-बाधन बताती है, छन्द अनुष्टुप्। वक्ता ऊपर उठे पत्तों वाली, देवों से प्रेरित, बलवती औषधि खोदती है, जिससे स्त्री अपनी सपत्नी को हराती है और पति को पाती है। वह औषधि से कहती है कि सपत्नी को दूर उड़ा दे और पति को केवल मेरा बना दे। मैं ऊँची हूँ, ऊँचों से भी ऊँची, और मेरी सपत्नी नीचों से भी नीची। वह औषधि को पति के नीचे रखती है कि उसका मन उसके पीछे ऐसे दौड़े जैसे गाय बछड़े के पीछे, जैसे जल अपने मार्ग पर।
इ॒मां ख॑ना॒म्योष॑धिं वी॒रुधं॒ बल॑वत्तमाम् ।
यया॑ स॒पत्नीं॒ बाध॑ते॒ यया॑ संवि॒न्दते॒ पति॑म्
imāṃ khanāmyoṣadhiṃ vīrudhaṃ balavattamām |
yayā sapatnīṃ bādhate yayā saṃvindate patim
उत्ता॑नपर्णे॒ सुभ॑गे॒ देव॑जूते॒ सह॑स्वति ।
स॒पत्नीं॑ मे॒ परा॑ धम॒ पतिं॑ मे॒ केव॑लं कुरु
uttānaparṇe subhage devajūte sahasvati |
sapatnīṃ me parā dhama patiṃ me kevalaṃ kuru
उत्त॑रा॒हमु॑त्तर॒ उत्त॒रेदुत्त॑राभ्यः ।
अथा॑ स॒पत्नी॒ या ममाध॑रा॒ साध॑राभ्यः
uttarāhamuttara uttareduttarābhyaḥ |
athā sapatnī yā mamādharā sādharābhyaḥ
न॒ह्य॑स्या॒ नाम॑ गृ॒भ्णामि॒ नो अ॒स्मिन्र॑मते॒ जने॑ ।
परा॑मे॒व प॑रा॒वतं॑ स॒पत्नीं॑ गमयामसि
nahyasyā nāma gṛbhṇāmi no asminramate jane |
parāmeva parāvataṃ sapatnīṃ gamayāmasi
अ॒हम॑स्मि॒ सह॑मा॒नाथ॒ त्वम॑सि सास॒हिः ।
उ॒भे सह॑स्वती भू॒त्वी स॒पत्नीं॑ मे सहावहै
ahamasmi sahamānātha tvamasi sāsahiḥ |
ubhe sahasvatī bhūtvī sapatnīṃ me sahāvahai
उप॑ तेऽधां॒ सह॑मानाम॒भि त्वा॑धां॒ सही॑यसा ।
मामनु॒ प्र ते॒ मनो॑ व॒त्सं गौरि॑व धावतु प॒था वारि॑व धावतु
upa te'dhāṃ sahamānāmabhi tvādhāṃ sahīyasā |
māmanu pra te mano vatsaṃ gauriva dhāvatu pathā vāriva dhāvatu
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