व॒नेम॑ पू॒र्वीर॒र्यो म॑नी॒षा अ॒ग्निः सु॒शोको॒ विश्वा॑न्यश्याः
vanema pūrvīraryo manīṣā agniḥ suśoko viśvānyaśyāḥ
ऋषि: पराशरः शाक्त्यः · देवता: अग्निः · छन्द: द्विपदा विराट्
11 श्लोक · 70 में से 191
बुद्धि से हम अनेक उत्तम वस्तुएँ पाएँ, पराशर शाक्त्य द्विपदा विराट् छन्द में कहते हैं। अग्नि देवों के व्रत और मनुष्यों का जन्म जानते हैं। वे जल के गर्भ हैं, वनों के गर्भ, सब स्थावर और सब जंगम के गर्भ। चट्टान में भी वे अमर होकर रहते हैं, जैसे अपनी प्रजा में गृहपति। हे अग्नि, देवों और मनुष्यों के जन्म जानते हुए इन लोकों की रक्षा करो। सब उन्हें भेंट लाते हैं; लोग अनेक स्थानों पर उनकी सेवा करते हैं और उनका धन वैसे पाते हैं जैसे पुत्र वृद्ध पिता का। युद्ध में वे धनुर्धर की तरह भयंकर हैं।
व॒नेम॑ पू॒र्वीर॒र्यो म॑नी॒षा अ॒ग्निः सु॒शोको॒ विश्वा॑न्यश्याः
vanema pūrvīraryo manīṣā agniḥ suśoko viśvānyaśyāḥ
आ दैव्या॑नि व्र॒ता चि॑कि॒त्वाना मानु॑षस्य॒ जन॑स्य॒ जन्म॑
ā daivyāni vratā cikitvānā mānuṣasya janasya janma
गर्भो॒ यो अ॒पां गर्भो॒ वना॑नां॒ गर्भ॑श्च स्था॒तां गर्भ॑श्च॒रथा॑म्
garbho yo apāṃ garbho vanānāṃ garbhaśca sthātāṃ garbhaścarathām
अद्रौ॑ चिदस्मा अ॒न्तर्दु॑रो॒णे वि॒शां न विश्वो॑ अ॒मृत॑ः स्वा॒धीः
adrau cidasmā antarduroṇe viśāṃ na viśvo amṛtaḥ svādhīḥ
स हि क्ष॒पावाँ॑ अ॒ग्नी र॑यी॒णां दाश॒द्यो अ॑स्मा॒ अरं॑ सू॒क्तैः
sa hi kṣapāvām̐ agnī rayīṇāṃ dāśadyo asmā araṃ sūktaiḥ
ए॒ता चि॑कित्वो॒ भूमा॒ नि पा॑हि दे॒वानां॒ जन्म॒ मर्ताँ॑श्च वि॒द्वान्
etā cikitvo bhūmā ni pāhi devānāṃ janma martām̐śca vidvān
वर्धा॒न्यं पू॒र्वीः क्ष॒पो विरू॑पाः स्था॒तुश्च॒ रथ॑मृ॒तप्र॑वीतम्
vardhānyaṃ pūrvīḥ kṣapo virūpāḥ sthātuśca rathamṛtapravītam
अरा॑धि॒ होता॒ स्व१॒॑र्निष॑त्तः कृ॒ण्वन्विश्वा॒न्यपां॑सि स॒त्या
arādhi hotā svarniṣattaḥ kṛṇvanviśvānyapāṃsi satyā
गोषु॒ प्रश॑स्तिं॒ वने॑षु धिषे॒ भर॑न्त॒ विश्वे॑ ब॒लिं स्व॑र्णः
goṣu praśastiṃ vaneṣu dhiṣe bharanta viśve baliṃ svarṇaḥ
वि त्वा॒ नर॑ः पुरु॒त्रा स॑पर्यन्पि॒तुर्न जिव्रे॒र्वि वेदो॑ भरन्त
vi tvā naraḥ purutrā saparyanpiturna jivrervi vedo bharanta
सा॒धुर्न गृ॒ध्नुरस्ते॑व॒ शूरो॒ याते॑व भी॒मस्त्वे॒षः स॒मत्सु॑
sādhurna gṛdhnurasteva śūro yāteva bhīmastveṣaḥ samatsu
पाठ का स्रोत: Wikisource · CC BY-SA 4.0 (Wikisource transcription of a public-domain text)