उषो॑ भ॒द्रेभि॒रा ग॑हि दि॒वश्चि॑द्रोच॒नादधि॑ ।
वह॑न्त्वरु॒णप्स॑व॒ उप॑ त्वा सो॒मिनो॑ गृ॒हम्
uṣo bhadrebhirā gahi divaścidrocanādadhi |
vahantvaruṇapsava upa tvā somino gṛham
ऋषि: प्रस्कण्वः काण्वः · देवता: उषाः · छन्द: अनुष्टुप्
4 श्लोक · 49 में से 191
प्रस्कण्व काण्व का अनुष्टुप् छन्द में छोटा सूक्त। उषा से कहा गया है कि आकाश के उज्ज्वल स्थान से कल्याण लेकर आएँ, लाल रंग के अश्व उन्हें सोम निचोड़ने वाले घर तक लाएँ। उनका रथ सुन्दर और सुखद है। उनके आते ही पंखों वाले पक्षी, दो पैर वाले और चार पैर वाले सब जाग उठते हैं। वे अपनी किरणों से सारे चमकते लोक को प्रकाशित करती हैं, और धन चाहने वाले कण्ववंशी गीतों से उन्हें पुकारते हैं।
उषो॑ भ॒द्रेभि॒रा ग॑हि दि॒वश्चि॑द्रोच॒नादधि॑ ।
वह॑न्त्वरु॒णप्स॑व॒ उप॑ त्वा सो॒मिनो॑ गृ॒हम्
uṣo bhadrebhirā gahi divaścidrocanādadhi |
vahantvaruṇapsava upa tvā somino gṛham
सु॒पेश॑सं सु॒खं रथं॒ यम॒ध्यस्था॑ उष॒स्त्वम् ।
तेना॑ सु॒श्रव॑सं॒ जनं॒ प्रावा॒द्य दु॑हितर्दिवः
supeśasaṃ sukhaṃ rathaṃ yamadhyasthā uṣastvam |
tenā suśravasaṃ janaṃ prāvādya duhitardivaḥ
वय॑श्चित्ते पत॒त्रिणो॑ द्वि॒पच्चतु॑ष्पदर्जुनि ।
उष॒ः प्रार॑न्नृ॒तूँरनु॑ दि॒वो अन्ते॑भ्य॒स्परि॑
vayaścitte patatriṇo dvipaccatuṣpadarjuni |
uṣaḥ prārannṛtūm̐ranu divo antebhyaspari
व्यु॒च्छन्ती॒ हि र॒श्मिभि॒र्विश्व॑मा॒भासि॑ रोच॒नम् ।
तां त्वामु॑षर्वसू॒यवो॑ गी॒र्भिः कण्वा॑ अहूषत
vyucchantī hi raśmibhirviśvamābhāsi rocanam |
tāṃ tvāmuṣarvasūyavo gīrbhiḥ kaṇvā ahūṣata
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