नारि बिबस नर सकल गोसाँई । नाचहिँ नट मरकट की नाई ॥
सूद्र द्विजन्ह उपदेसहिँ ज्ञानी । मेलि जनेऊ लेहिँ कुदाना ॥
nāri bibasa nara sakala gosām̐ī | nācahim̐ naṭa marakaṭa kī nāī ||
sūdra dvijanha upadesahim̐ jñānī | meli janeū lehim̐ kudānā ||
6 श्लोक · 99 में से 130
काकभुशुण्डि गरुड़ को कलि के लक्षण आगे सुनाते हैं। पुरुष स्त्री के वश में मदारी के बन्दर-से नाचते हैं। शूद्र द्विजों को ज्ञान सिखाते हैं और लोग जनेऊ पहनकर कुदान लेते हैं। सब काम, लोभ और क्रोध में रत, वेद, ब्राह्मण और सन्तों के विरोधी हैं। स्त्रियाँ गुणवान पति छोड़ देतीं; सुहागिनें बिना आभूषण और विधवाएँ नये शृंगार में रहतीं। गुरु-शिष्य बहरे और अन्धे जैसे हैं; जो गुरु धन हरे पर शोक न हरे, वह नरक में पड़ता है। माता-पिता पेट भरने का धर्म सिखाते हैं। सब ब्रह्मज्ञान बघारते, पर कौड़ी के लिए ब्राह्मण और गुरु का घात करते, और शूद्र आँखें दिखाकर कहते कि हम तुमसे क्या कम हैं।
नारि बिबस नर सकल गोसाँई । नाचहिँ नट मरकट की नाई ॥
सूद्र द्विजन्ह उपदेसहिँ ज्ञानी । मेलि जनेऊ लेहिँ कुदाना ॥
nāri bibasa nara sakala gosām̐ī | nācahim̐ naṭa marakaṭa kī nāī ||
sūdra dvijanha upadesahim̐ jñānī | meli janeū lehim̐ kudānā ||
सब नर काम लोभ रत क्रोधी । बेद विप्र श्रुति सन्त बिरोधी ॥
गुन मन्दिर सुन्दर पति त्यागी । भजहिँ नारि पर पुरुष अभागी ॥
saba nara kāma lobha rata krodhī | beda vipra śruti santa birodhī ||
guna mandira sundara pati tyāgī | bhajahim̐ nāri para puruṣa abhāgī ||
सौभागिनीं बिभूषन हीना । बिधवन्ह के सिङ्गार नबीना ॥
गुरु सिष बधिर अन्ध कर लेखा । एक न सुनइ एक नहिँ देखा ॥
saubhāginīṃ bibhūṣana hīnā | bidhavanha ke siṅgāra nabīnā ||
guru siṣa badhira andha kara lekhā | eka na sunai eka nahim̐ dekhā ||
हरइ सिष्य धन सोक न हरई । सो गुरु घोर नरक महुँ परई ॥
मातु पिता बालकन्हि बोलाबहिं । उदर भरै सोइ धर्म सिखावहिँ ॥
harai siṣya dhana soka na haraī | so guru ghora naraka mahum̐ paraī ||
mātu pitā bālakanhi bolābahiṃ | udara bharai soi dharma sikhāvahim̐ ||
ब्रह्म ग्यान बिनु नारि नर, कहहिं न दूसरि बात ।
कौड़ी लागि लोभ बस, करहिं विप्र गुरु घात ॥
brahma gyāna binu nāri nara, kahahiṃ na dūsari bāta |
kaur̤ī lāgi lobha basa, karahiṃ vipra guru ghāta ||
बादहिँ सूद्र द्विजन्ह सन, हम तुम्ह तँ कछु घाटि ।
जानइ ब्रह्म सो बिप्रबर आँखि देखावहिं डाटि ॥
bādahim̐ sūdra dvijanha sana, hama tumha tam̐ kachu ghāṭi |
jānai brahma so biprabara ām̐khi dekhāvahiṃ ḍāṭi ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0