उत्तरकाण्ड

अध्याय 95: अनेक जन्मों की सुधि, इस देह से प्रीति

6 श्लोक · 95 में से 130

इस अध्याय में क्या होता है

अनेक जन्मों की सुधि, इस देह से प्रीति

भगवान शिव उमा से कहते हैं कि गरुड़ की वाणी सुनकर काग हर्षित हुए। भुशुण्डि बोले, धन्य है आपकी बुद्धि; आपका प्रश्न मुझे प्यारा है, और उससे बहुत-से जन्मों की सुधि लौट आई है। सुनिए, मैं अपनी सारी कथा गाकर कहता हूँ। जप, तप, यज्ञ, व्रत, दान, योग और विज्ञान, सबका फल रघुपति के चरणों में प्रेम है; उसके बिना किसी का कल्याण नहीं। इसी शरीर में उन्हें राम-भक्ति मिली, इसलिए इस पर ममता है। जिससे अपना हित हो, उस पर सब ममता करते हैं। सज्जन और श्रुति कहते हैं कि परम हित जानकर नीच से भी प्रीति करो। रेशम का कीड़ा अपवित्र है, पर उससे रेशमी वस्त्र बनता है, इसलिए लोग उसे प्राणों-सा पालते हैं।

95.1

गरुड़ गिरा सुनि हरषेउ कागा । बोलेउ उमा सहित अनुरागा ॥
धन्य धन्य तव मति उरगारी । प्रस्न तुम्हारि मोहि अति प्यारी ॥

garur̤a girā suni haraṣeu kāgā | boleu umā sahita anurāgā ||
dhanya dhanya tava mati uragārī | prasna tumhāri mohi ati pyārī ||

95.2

सुनि तव प्रस्न सप्रेम सुहाई । बहुत जनम की सुधि मोहि आई ॥
सब निज कथा कहउँ मैं गाई । तात सुनहु सादर मन लाई ॥

suni tava prasna saprema suhāī | bahuta janama kī sudhi mohi āī ||
saba nija kathā kahaum̐ maiṃ gāī | tāta sunahu sādara mana lāī ||

95.3

जप तप मख सम दम ब्रत दाना । बिरति बिबेक जोग बिज्ञाना ॥
सब कर फल रघुपति-पद प्रेमा । तेहि बिनु कोउ न पावइ छेमा ॥

japa tapa makha sama dama brata dānā | birati bibeka joga bijñānā ||
saba kara phala raghupati-pada premā | tehi binu kou na pāvai chemā ||

95.4

एहि तन राम भगति मैं पाई । ताते मोहि ममता अधिकाई ॥
जेहि तेँ कछु निज स्वारथ होई । तेहि पर ममता कर सब कोई ॥

ehi tana rāma bhagati maiṃ pāī | tāte mohi mamatā adhikāī ||
jehi tem̐ kachu nija svāratha hoī | tehi para mamatā kara saba koī ||

95.सो॰ 95 (क)सोरठा

पन्नगारि असि नीति, श्रुति सम्मत सज्जन कहहिं ।
अति नीचहु सन प्रीति करिअ जानि निज परम हित ॥

pannagāri asi nīti, śruti sammata sajjana kahahiṃ |
ati nīcahu sana prīti karia jāni nija parama hita ||

दो॰ 95 (ख)दोहा

पाट कीट तेँ होइ, तेहि तेँ पाटम्बर रुचिर ।
कृमि पालइ सबु कोइ परम अपावन प्रान सम ॥

pāṭa kīṭa tem̐ hoi, tehi tem̐ pāṭambara rucira |
kṛmi pālai sabu koi parama apāvana prāna sama ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0