तुम्ह सर्वज्ञ तन्य तम पारा । सुमति सुसील सरल आचारा ॥
ज्ञान बिरति विज्ञान निवासा । रघुनायक के तुम्ह प्रिय दासा ॥
tumha sarvajña tanya tama pārā | sumati susīla sarala ācārā ||
jñāna birati vijñāna nivāsā | raghunāyaka ke tumha priya dāsā ||
6 श्लोक · 94 में से 130
गरुड़ काकभुशुण्डि से प्रश्न करते हैं। आप सर्वज्ञ हैं, अन्धकार से परे, सुशील और सरल, ज्ञान और वैराग्य के निवास, रघुनायक के प्रिय दास हैं। फिर आपने काग-शरीर क्यों पाया? हे आकाशगामी, यह रामचरित-सरोवर आपको कहाँ मिला? फिर संशय जोड़ते हैं। उन्होंने शिव से सुना है कि महाप्रलय में भी भुशुण्डि का नाश नहीं होता, और ईश्वर झूठ नहीं कहते। पर नाग, नर, देवता सब काल के कलेवा हैं; काल अनगिनत ब्रह्माण्डों का लय करता है और उसे कोई नहीं लाँघता। वह आपको क्यों नहीं व्यापता? यह ज्ञान का प्रभाव है या योग का बल? आपके आश्रम में आते ही मेरा मोह भागा; कारण प्रेम से कहिए।
तुम्ह सर्वज्ञ तन्य तम पारा । सुमति सुसील सरल आचारा ॥
ज्ञान बिरति विज्ञान निवासा । रघुनायक के तुम्ह प्रिय दासा ॥
tumha sarvajña tanya tama pārā | sumati susīla sarala ācārā ||
jñāna birati vijñāna nivāsā | raghunāyaka ke tumha priya dāsā ||
कारन कवन देह यह पाई । तात सकल मोहि कहहु बुझाई ॥
राम चरित सर सुन्दर स्वामी । पायहु कहाँ कहहु नभगामी ॥
kārana kavana deha yaha pāī | tāta sakala mohi kahahu bujhāī ||
rāma carita sara sundara svāmī | pāyahu kahām̐ kahahu nabhagāmī ||
नाथ सुना मैं अस सिव पाहीँ । महा प्रलयहुँ नास तब नाहीँ ॥
मुधा बचन नहिं ईस्वर कहई । सोउ मोरें मन संसय अहई ॥
nātha sunā maiṃ asa siva pāhīm̐ | mahā pralayahum̐ nāsa taba nāhīm̐ ||
mudhā bacana nahiṃ īsvara kahaī | sou moreṃ mana saṃsaya ahaī ||
अग जग जीव नाग नर देवा । नाथ सकल जग काल कलेवा ॥
अंड कटाह अमित लय कारी । काल सदा दुरतिक्रम भारी ॥
aga jaga jīva nāga nara devā | nātha sakala jaga kāla kalevā ||
aṃḍa kaṭāha amita laya kārī | kāla sadā duratikrama bhārī ||
तुम्हहिं न ब्यापत काल, अति कराल कारन कवन ।
मोहि सो कहहु कृपाल, ज्ञान प्रभाव कि जोग बल ॥
tumhahiṃ na byāpata kāla, ati karāla kārana kavana |
mohi so kahahu kṛpāla, jñāna prabhāva ki joga bala ||
प्रभु तव आश्रम आयउँ, मोर मोह भ्रम भाग ।
कारन कवन सो नाथ सब, कहहु सहित अनुराग ॥
prabhu tava āśrama āyaum̐, mora moha bhrama bhāga |
kārana kavana so nātha saba, kahahu sahita anurāga ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0