उत्तरकाण्ड

अध्याय 75: बालक राम के साथ अयोध्या में भुशुण्डि

6 श्लोक · 75 में से 130

इस अध्याय में क्या होता है

बालक राम के साथ अयोध्या में भुशुण्डि

भुशुण्डि अब गरुड़ को राम-कृपा और अपनी जड़ता की बात सुनाते हैं। जब-जब श्रीराम मनुष्य-शरीर धरकर भक्तों के लिए अनेक लीलाएँ करते हैं, तब-तब मैं अवधपुरी जाता हूँ और बाल-चरित देखकर हर्षित होता हूँ। वहाँ जाकर जन्म-महोत्सव देखता हूँ और मोहित होकर पाँच वर्ष वहीं रहता हूँ। मेरे इष्टदेव बालक राम हैं, जिनके शरीर में सौ करोड़ कामदेवों की शोभा है। छोटे कौए का शरीर धरकर हरि के साथ रहता हूँ और उनके रंग-बिरंगे बाल-चरित देखता हूँ। लड़कपन में वे जहाँ-जहाँ घूमते हैं, वहाँ-वहाँ मैं साथ उड़ता हूँ, और आँगन में जो जूठन गिरती है, उसे उठाकर खा लेता हूँ। एक बार रघुवीर ने अद्भुत चरित किया; उस लीला का स्मरण करते ही भुशुण्डि का शरीर पुलकित हो गया।

75.1

राम कृपा आपनि जड़ताई । कहउँ खगेस सुनहु मन लाई ॥
जय जय राम मनुज तनु धरहीँ । भगत हेतु लीला बहु करहीं ॥

rāma kṛpā āpani jar̤atāī | kahaum̐ khagesa sunahu mana lāī ||
jaya jaya rāma manuja tanu dharahīm̐ | bhagata hetu līlā bahu karahīṃ ||

75.2

सब तब अवधपुरी मैं जाऊँ । बालचरित बिलोकि हरषाऊँ ॥
जनम-महोत्सव देखउँ जाई । बरष पाँच तहँ रहउँ लोभाई ॥

saba taba avadhapurī maiṃ jāūm̐ | bālacarita biloki haraṣāūm̐ ||
janama-mahotsava dekhaum̐ jāī | baraṣa pām̐ca taham̐ rahaum̐ lobhāī ||

75.3

इष्टदेव मम बालक रामा । सोभा बपुष कोटि सत कामा ॥
निज प्रभु बदन निहारि निहारी । लोचन सफल करउँ उरगारी ॥

iṣṭadeva mama bālaka rāmā | sobhā bapuṣa koṭi sata kāmā ||
nija prabhu badana nihāri nihārī | locana saphala karaum̐ uragārī ||

75.4

लघु बायस बपु धरि हरि सङ्गा । देखउँ बालचरित बहुरंगा ॥

laghu bāyasa bapu dhari hari saṅgā | dekhaum̐ bālacarita bahuraṃgā ||

दो॰ 75 (क)दोहा

लरिकाईं जहँ जहँ फिरहिँ, तहँ तहँ सङ्ग उड़ाउँ ।
जूठनि परइ अजिर महँ, सो उठाइ करि खाउँ ॥

larikāīṃ jaham̐ jaham̐ phirahim̐, taham̐ taham̐ saṅga ur̤āum̐ |
jūṭhani parai ajira maham̐, so uṭhāi kari khāum̐ ||

दो॰ 75 (ख)दोहा

एक बार अतिसय सब, चरित किये रघुबीर ।
सुमिरत प्रभु लीला सोइ, पुलकित भयउ सरीर ॥

eka bāra atisaya saba, carita kiye raghubīra |
sumirata prabhu līlā soi, pulakita bhayau sarīra ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0