निसिचर निकर मरन बिधि नाना । रघुपति रावन समर बखाना ॥
रावन बध मन्दोदरि सोका । राज बिभीषन देव असोका ॥
nisicara nikara marana bidhi nānā | raghupati rāvana samara bakhānā ||
rāvana badha mandodari sokā | rāja bibhīṣana deva asokā ||
6 श्लोक · 68 में से 130
भगवान शिव भवानी से कहते हैं, भुशुण्डि ने आगे राक्षस-समूह के अनेक प्रकार के मरण, रघुपति और रावण का युद्ध, रावण-वध और मन्दोदरी का शोक, विभीषण का राज्य और देवताओं का शोक-रहित होना कहा। फिर सीता और रघुपति का मिलन, हाथ जोड़कर देवताओं की स्तुति, और वानरों सहित पुष्पक पर चढ़कर कृपानिकेत प्रभु का अवध की ओर चलना। कौए ने गाया कि श्रीराम अपने नगर कैसे आए, फिर राम-अभिषेक, नगर का वर्णन और राजनीति के अनेक रूप। जो कथा मैंने तुमसे कही, वही सारी भुशुण्डि ने कही। रामकथा सुनकर पक्षिराज परम उत्साह से बोले: हे काक-शिरोमणि, आपके प्रसाद से मेरा सन्देह चला गया और राम-चरणों में स्नेह हुआ। रण में प्रभु को बँधा देखकर मुझे बड़ा मोह हुआ था कि चिदानन्दघन राम व्याकुल क्यों हों?
निसिचर निकर मरन बिधि नाना । रघुपति रावन समर बखाना ॥
रावन बध मन्दोदरि सोका । राज बिभीषन देव असोका ॥
nisicara nikara marana bidhi nānā | raghupati rāvana samara bakhānā ||
rāvana badha mandodari sokā | rāja bibhīṣana deva asokā ||
सीता रघुपति मिलन बहोरी । सुरन्ह कीन्ह अस्तुति कर जोरी ॥
पुनि पुष्पक चढ़ि कपिन्ह समेता । अवध चले प्रभु कृपा निकेता ॥
sītā raghupati milana bahorī | suranha kīnha astuti kara jorī ||
puni puṣpaka car̤hi kapinha sametā | avadha cale prabhu kṛpā niketā ||
जेहि बिधि राम नगर निज आये । बायस बिसद चरित सब गाये ॥
कहेसि बहोरि राम अभिषैका । पुर बरनत नृपनीति अनेका ॥
jehi bidhi rāma nagara nija āye | bāyasa bisada carita saba gāye ||
kahesi bahori rāma abhiṣaikā | pura baranata nṛpanīti anekā ||
कथा समस्त भुसुंडि बखानी । जो मैं तुम्ह सन कही भवानी ॥
सुनि सन रामकथा खगनाहा । कहत बचन मन परम उछाहा ॥
kathā samasta bhusuṃḍi bakhānī | jo maiṃ tumha sana kahī bhavānī ||
suni sana rāmakathā khaganāhā | kahata bacana mana parama uchāhā ||
गयउ मोर सन्देह, सुनेउँ सकल रघुपति चरित ।
भयउ राम-पद नेह, तव प्रसाद बायस-तिलक ॥
gayau mora sandeha, suneum̐ sakala raghupati carita |
bhayau rāma-pada neha, tava prasāda bāyasa-tilaka ||
मोहि भयउ अति मोह, प्रभु बन्धन रन महुँ निरखि ।
चिदानन्द सन्दोह, राम विकल कारन कवन ॥
mohi bhayau ati moha, prabhu bandhana rana mahum̐ nirakhi |
cidānanda sandoha, rāma vikala kārana kavana ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0