उत्तरकाण्ड

अध्याय 66: भुशुण्डि का अरण्य और किष्किन्धा वर्णन

6 श्लोक · 66 में से 130

इस अध्याय में क्या होता है

भुशुण्डि का अरण्य और किष्किन्धा वर्णन

भगवान शिव उमा को बताते हैं कि भुशुण्डि की कथा आगे बढ़ी। उन्होंने दण्डक वन की पवित्रता और गिद्ध जटायु से मित्रता गाई; पंचवटी में प्रभु का निवास, जहाँ मुनियों का सब भय मिटा; लक्ष्मण को दिया अनुपम उपदेश; शूर्पणखा को कुरूप करना; खर-दूषण का वध, और रावण का सब भेद जान लेना। रावण और मारीच की बातचीत, माया-सीता का हरण, और श्रीरघुवीर का कुछ विरह-वर्णन। फिर प्रभु का गिद्ध की क्रिया करना, कबन्ध को मारकर शबरी को सद्गति देना, और विरह बखानते हुए सरोवर के तट पर जाना। उसके बाद नारद-संवाद, हनुमान से मिलन, सुग्रीव से मित्रता और बालि का प्राणान्त; सुग्रीव का राजतिलक, प्रवर्षण पर्वत पर निवास, वर्षा और शरद का वर्णन, तथा श्रीराम का रोष जिससे वानरराज डर गया।

66.1

कहि दंडक बन पावनताई । गीध मइत्री पुनि तेहिं गाई ॥
पुनि प्रभु पंचवटीं कुल बासा । भंजी सकल मुनिन्ह के त्रासा ॥

kahi daṃḍaka bana pāvanatāī | gīdha maitrī puni tehiṃ gāī ||
puni prabhu paṃcavaṭīṃ kula bāsā | bhaṃjī sakala muninha ke trāsā ||

66.2

पुनि लछिमन उपदेस अनूपा । सूपनखा जिमि कीन्ह कुरूपा ॥
खर दूषन बध बहुरि बखाना । जिमि सब मरम दसानन जाना ॥

puni lachimana upadesa anūpā | sūpanakhā jimi kīnha kurūpā ||
khara dūṣana badha bahuri bakhānā | jimi saba marama dasānana jānā ||

66.3

दसकन्धर मारीच बतकहीं । जेहि विधि भई सो सब तेहिं कही ॥
पुनि माया सीता कर हरना । श्रीरघुबीर बिरह कछु बरना ॥

dasakandhara mārīca batakahīṃ | jehi vidhi bhaī so saba tehiṃ kahī ||
puni māyā sītā kara haranā | śrīraghubīra biraha kachu baranā ||

66.4

पुनि प्रभु गीध क्रिया जिमि कीन्ही । बधि कबन्ध सबरिहि गति दीन्ही ॥
बहुरि बिरह बरनत रघुबीरा । जेहि बिधि गये सरोवर तीरा ॥

puni prabhu gīdha kriyā jimi kīnhī | badhi kabandha sabarihi gati dīnhī ||
bahuri biraha baranata raghubīrā | jehi bidhi gaye sarovara tīrā ||

दो॰दोहा

प्रभु नारद सम्बाद कहि, मारुति मिलन प्रसङ्ग ।
पुनि सुग्रीव मिताई, बालि प्रान कर भङ्ग ॥

prabhu nārada sambāda kahi, māruti milana prasaṅga |
puni sugrīva mitāī, bāli prāna kara bhaṅga ||

दो॰ 66 (ख)दोहा

कपिहि तिलक करि प्रभु कृत, सैल प्रबरषन बास ।
बरनन बर्षा सरद अरु, राम रोष कपि त्रास ॥

kapihi tilaka kari prabhu kṛta, saila prabaraṣana bāsa |
baranana barṣā sarada aru, rāma roṣa kapi trāsa ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0