कहि दंडक बन पावनताई । गीध मइत्री पुनि तेहिं गाई ॥
पुनि प्रभु पंचवटीं कुल बासा । भंजी सकल मुनिन्ह के त्रासा ॥
kahi daṃḍaka bana pāvanatāī | gīdha maitrī puni tehiṃ gāī ||
puni prabhu paṃcavaṭīṃ kula bāsā | bhaṃjī sakala muninha ke trāsā ||
6 श्लोक · 66 में से 130
भगवान शिव उमा को बताते हैं कि भुशुण्डि की कथा आगे बढ़ी। उन्होंने दण्डक वन की पवित्रता और गिद्ध जटायु से मित्रता गाई; पंचवटी में प्रभु का निवास, जहाँ मुनियों का सब भय मिटा; लक्ष्मण को दिया अनुपम उपदेश; शूर्पणखा को कुरूप करना; खर-दूषण का वध, और रावण का सब भेद जान लेना। रावण और मारीच की बातचीत, माया-सीता का हरण, और श्रीरघुवीर का कुछ विरह-वर्णन। फिर प्रभु का गिद्ध की क्रिया करना, कबन्ध को मारकर शबरी को सद्गति देना, और विरह बखानते हुए सरोवर के तट पर जाना। उसके बाद नारद-संवाद, हनुमान से मिलन, सुग्रीव से मित्रता और बालि का प्राणान्त; सुग्रीव का राजतिलक, प्रवर्षण पर्वत पर निवास, वर्षा और शरद का वर्णन, तथा श्रीराम का रोष जिससे वानरराज डर गया।
कहि दंडक बन पावनताई । गीध मइत्री पुनि तेहिं गाई ॥
पुनि प्रभु पंचवटीं कुल बासा । भंजी सकल मुनिन्ह के त्रासा ॥
kahi daṃḍaka bana pāvanatāī | gīdha maitrī puni tehiṃ gāī ||
puni prabhu paṃcavaṭīṃ kula bāsā | bhaṃjī sakala muninha ke trāsā ||
पुनि लछिमन उपदेस अनूपा । सूपनखा जिमि कीन्ह कुरूपा ॥
खर दूषन बध बहुरि बखाना । जिमि सब मरम दसानन जाना ॥
puni lachimana upadesa anūpā | sūpanakhā jimi kīnha kurūpā ||
khara dūṣana badha bahuri bakhānā | jimi saba marama dasānana jānā ||
दसकन्धर मारीच बतकहीं । जेहि विधि भई सो सब तेहिं कही ॥
पुनि माया सीता कर हरना । श्रीरघुबीर बिरह कछु बरना ॥
dasakandhara mārīca batakahīṃ | jehi vidhi bhaī so saba tehiṃ kahī ||
puni māyā sītā kara haranā | śrīraghubīra biraha kachu baranā ||
पुनि प्रभु गीध क्रिया जिमि कीन्ही । बधि कबन्ध सबरिहि गति दीन्ही ॥
बहुरि बिरह बरनत रघुबीरा । जेहि बिधि गये सरोवर तीरा ॥
puni prabhu gīdha kriyā jimi kīnhī | badhi kabandha sabarihi gati dīnhī ||
bahuri biraha baranata raghubīrā | jehi bidhi gaye sarovara tīrā ||
प्रभु नारद सम्बाद कहि, मारुति मिलन प्रसङ्ग ।
पुनि सुग्रीव मिताई, बालि प्रान कर भङ्ग ॥
prabhu nārada sambāda kahi, māruti milana prasaṅga |
puni sugrīva mitāī, bāli prāna kara bhaṅga ||
कपिहि तिलक करि प्रभु कृत, सैल प्रबरषन बास ।
बरनन बर्षा सरद अरु, राम रोष कपि त्रास ॥
kapihi tilaka kari prabhu kṛta, saila prabaraṣana bāsa |
baranana barṣā sarada aru, rāma roṣa kapi trāsa ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0