उत्तरकाण्ड

अध्याय 53: उमा का प्रश्न, कौए में राम-भक्ति कैसे

5 श्लोक · 53 में से 130

इस अध्याय में क्या होता है

उमा का प्रश्न, कौए में राम-भक्ति कैसे

उमा भगवान शिव से आगे कहती हैं। जो राम-चरित सुनकर तृप्त हो जाते हैं, उन्होंने उसका रस नहीं जाना; जीवन्मुक्त महामुनि भी निरन्तर हरि के गुण सुनते हैं। भवसागर पार करने वाले के लिए राम-कथा दृढ़ नौका है, और विषयी जनों को भी वह मधुर लगती है। कानों वाला ऐसा कौन है जिसे रघुपति का चरित न भाए? जिन्हें यह कथा नहीं सुहाती, वे जड़ जीव अपनी ही आत्मा का घात करते हैं। हे नाथ, आपने हरि-चरित का मानस गाया, सुनकर मुझे अपार सुख मिला। फिर उनकी शंका: आपने कहा कि यह कथा कागभुशुण्डि ने गरुड़ को सुनाई। दृढ़ वैराग्य, ज्ञान, विज्ञान और रघुपति की भक्ति, वह भी कौए के शरीर में? इस पर मुझे बड़ा सन्देह है।

53.1

राम चरित जे सुनत अघाहीं । रस बिसेष जाना तिन्ह नाहीं ॥
जीवनमुक्त महामुनि जेऊ । हरि गुन सुनहिँ निरन्तर तेऊ ॥

rāma carita je sunata aghāhīṃ | rasa biseṣa jānā tinha nāhīṃ ||
jīvanamukta mahāmuni jeū | hari guna sunahim̐ nirantara teū ||

53.2

भव सागर चह पार जो पावा । राम कथा ता कहँ दृढ़ नावा ॥
बिषइन्ह कहँ पुनि हरि-गुन-ग्रामा । सवन सुखद अरु मन अभिरामा ॥

bhava sāgara caha pāra jo pāvā | rāma kathā tā kaham̐ dṛr̤ha nāvā ||
biṣainha kaham̐ puni hari-guna-grāmā | savana sukhada aru mana abhirāmā ||

53.3

श्रवनवंत अस को जग माहीँ । जाहि न रघुपति चरित सोहाहीं ॥
ते जड़ जीव निजात्मक-घाती । जिन्हहि न रघुपति कथा सोहाती ॥

śravanavaṃta asa ko jaga māhīm̐ | jāhi na raghupati carita sohāhīṃ ||
te jar̤a jīva nijātmaka-ghātī | jinhahi na raghupati kathā sohātī ||

53.4

हरिचरित्र मानस तुम्ह गावा । सुनि मैं नाथ अमित सुख पाना ॥
तुम्ह जो कही यह कथा सुहाई । कागभसुंडि गरुड़ प्रति गाई ॥

haricaritra mānasa tumha gāvā | suni maiṃ nātha amita sukha pānā ||
tumha jo kahī yaha kathā suhāī | kāgabhasuṃḍi garur̤a prati gāī ||

दो॰ 53दोहा

बिरति ज्ञान विज्ञान दृढ़, रामचरित अति नेह ।
बायस तन रघुपति भगति, मोहि परम सन्देह ॥

birati jñāna vijñāna dṛr̤ha, rāmacarita ati neha |
bāyasa tana raghupati bhagati, mohi parama sandeha ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0