पर-हित सरिस धर्म नहिँ भाई । पर-पीड़ा सम नहिँ अधमाई ॥
निर्नय सकल पुरान बेद कर । कहेउँ तात जानहिँ कोबिद नर ॥
para-hita sarisa dharma nahim̐ bhāī | para-pīr̤ā sama nahim̐ adhamāī ||
nirnaya sakala purāna beda kara | kaheum̐ tāta jānahim̐ kobida nara ||
5 श्लोक · 41 में से 130
श्रीराम वेदों और पुराणों का निर्णय कहते हैं: भाई, परहित के समान कोई धर्म नहीं, और परपीड़ा के समान कोई अधमता नहीं। जो मनुष्य-शरीर पाकर दूसरों को पीड़ा देते हैं, वे संसार का महान भय सहते हैं। स्वार्थ में लगकर वे अपना परलोक नष्ट कर लेते हैं। उनके लिए मैं कालरूप हूँ, शुभ और अशुभ कर्मों का फल देने वाला। यह विचारकर चतुर लोग संसार का दुःख जानकर बाँधने वाले कर्म छोड़ते हैं और मुझे भजते हैं। सन्तों और असन्तों के जो गुण मैंने कहे, उन्हें समझने वाले फिर भवसागर में नहीं पड़ते। माया से रचे गुण और दोष अनेक हैं; गुण यही है कि दोनों में से कोई न देखा जाए, इन्हें देखना ही अविवेक है।
पर-हित सरिस धर्म नहिँ भाई । पर-पीड़ा सम नहिँ अधमाई ॥
निर्नय सकल पुरान बेद कर । कहेउँ तात जानहिँ कोबिद नर ॥
para-hita sarisa dharma nahim̐ bhāī | para-pīr̤ā sama nahim̐ adhamāī ||
nirnaya sakala purāna beda kara | kaheum̐ tāta jānahim̐ kobida nara ||
नर सरीर धरि जे पर पीरा । करहिं ते सहहिं महा भव भीरा ॥
करहिँ मोह अस नर अघ नाना । स्वारथ रत परलोक नसाना ॥
nara sarīra dhari je para pīrā | karahiṃ te sahahiṃ mahā bhava bhīrā ||
karahim̐ moha asa nara agha nānā | svāratha rata paraloka nasānā ||
काल रूप तिन्ह कहँ मैं भ्राता । सुभ अरु असुभ करम फल दाता ॥
अस बिचारि जे परम सयाने । भजहिँ मोहि संसृत दुख जाने ॥
kāla rūpa tinha kaham̐ maiṃ bhrātā | subha aru asubha karama phala dātā ||
asa bicāri je parama sayāne | bhajahim̐ mohi saṃsṛta dukha jāne ||
त्यागहिं करम सुभासुभ-दायक । भजहिँ मोहि सुर नर मुनि नायक ॥
सन्त असन्तन्ह के गुन भाखे । ते न परहिँ भव जिन्ह लखि राखे ॥
tyāgahiṃ karama subhāsubha-dāyaka | bhajahim̐ mohi sura nara muni nāyaka ||
santa asantanha ke guna bhākhe | te na parahim̐ bhava jinha lakhi rākhe ||
सुनहु तात माया कृत, गुन अरु दोष अनेक ।
गुन यह उभय न देखिअहिं, देखिय सो अबिबेक ॥
sunahu tāta māyā kṛta, guna aru doṣa aneka |
guna yaha ubhaya na dekhiahiṃ, dekhiya so abibeka ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0