उत्तरकाण्ड

अध्याय 40: कलियुग में ऐसे अधमों की भीड़

5 श्लोक · 40 में से 130

इस अध्याय में क्या होता है

कलियुग में ऐसे अधमों की भीड़

श्रीराम आगे कहते हैं, लोभ ही उनका ओढ़ना और बिछौना है; वे पेट के लिए जीते हैं, उन्हें यमपुर का डर नहीं। किसी की बड़ाई सुनकर ऐसे साँस लेते हैं मानो जूड़ी चढ़ आई हो, और किसी को विपत्ति में देखकर ऐसे सुखी होते हैं मानो जगत के राजा बन गए हों। स्वार्थी, लम्पट और अत्यन्त क्रोधी, वे परिवार से लड़ते हैं और माता, पिता, गुरु, ब्राह्मण किसी को नहीं मानते; स्वयं नष्ट होकर दूसरों को भी नष्ट करते हैं। उन्हें न सन्त भाते हैं, न हरिकथा। वे वेद की निन्दा करते, पराया धन हड़पते और सुन्दर वेश में कपट छिपाते हैं। ऐसे अधम सत्ययुग और त्रेता में नहीं होते, द्वापर में थोड़े होते हैं, और कलियुग में इनके झुण्ड होंगे।

40.1

लोभइ ओढ़न लोभइ डासन । सिस्त्रोदर पर जमपुर त्रास न ॥
काहू की जौँ सुनहिँ बड़ाई । स्वास लेहिँ जनु जूड़ी आई ॥

lobhai or̤hana lobhai ḍāsana | sistrodara para jamapura trāsa na ||
kāhū kī jaum̐ sunahim̐ bar̤āī | svāsa lehim̐ janu jūr̤ī āī ||

40.2

जब काहू के देखहिँ बिपती । सुखी भए मानहुँ जग नृपती ॥
स्वारथ रथ परिवार बिरोधी । लम्पट काम लोभ अति क्रोधी ॥

jaba kāhū ke dekhahim̐ bipatī | sukhī bhae mānahum̐ jaga nṛpatī ||
svāratha ratha parivāra birodhī | lampaṭa kāma lobha ati krodhī ||

40.3

मातु पिता गुरु बिप्र न मानहिँ । आपु गये अरु घालहिँ आनहिँ ॥
करहिँ मोह बस द्रोह परावा । सन्त सङ्ग हरि कथा न भावा ॥

mātu pitā guru bipra na mānahim̐ | āpu gaye aru ghālahim̐ ānahim̐ ||
karahim̐ moha basa droha parāvā | santa saṅga hari kathā na bhāvā ||

40.4

अवगुन-सिन्धु मन्दमति कामी । बेद विदूषक परधन स्वामी ॥
बिप्र द्रोह पर द्रोह बिसेषा । दम्भ कपट जियँ धरें सुबेषा ॥

avaguna-sindhu mandamati kāmī | beda vidūṣaka paradhana svāmī ||
bipra droha para droha biseṣā | dambha kapaṭa jiyam̐ dhareṃ subeṣā ||

दो॰ 40दोहा

ऐसे अधम मनुज खल, कृतजुग त्रेता नाहिँ ।
द्वापर कछुक बृन्द बहु, होइहहिँ कलिजुग माहिं ॥

aise adhama manuja khala, kṛtajuga tretā nāhim̐ |
dvāpara kachuka bṛnda bahu, hoihahim̐ kalijuga māhiṃ ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0