उत्तरकाण्ड

अध्याय 4: श्रीराम वानरों को जन्मभूमि दिखाते हैं

6 श्लोक · 4 में से 130

इस अध्याय में क्या होता है

श्रीराम वानरों को जन्मभूमि दिखाते हैं

विमान से श्रीराम सुग्रीव, अंगद और विभीषण को नगरी दिखाते हैं। वेद-पुराण वैकुण्ठ की महिमा गाते हैं, वे कहते हैं, फिर भी अवधपुरी के समान मुझे वह भी प्रिय नहीं, और यह रहस्य कोई विरला ही जानता है। यह मेरी जन्मभूमि है। इसके उत्तर में पावन सरयू बहती है, जिसमें स्नान करने वाला बिना परिश्रम मेरे समीप वास पाता है। यहाँ के निवासी मुझे अत्यन्त प्रिय हैं, और यह पुरी मेरा धाम देती है। वानर कहते हैं, धन्य है अयोध्या, जिसकी प्रशंसा स्वयं श्रीराम करते हैं। लोगों को आते देख प्रभु विमान उतारते हैं और पुष्पक को कुबेर के पास भेज देते हैं। वह आज्ञा के हर्ष और बिछोह के दुःख के साथ जाता है।

4.1

इहाँ भानुकुल-कमल दिवाकर । कपिन्ह देखावत नगर मनोहर ॥
सुनु कपीस अङ्गद लंकेसा । पावन पुरी रुचिर यह देसा ॥

ihām̐ bhānukula-kamala divākara | kapinha dekhāvata nagara manohara ||
sunu kapīsa aṅgada laṃkesā | pāvana purī rucira yaha desā ||

4.2

जद्यपि सब बैकुंठ बखाना । बेद पुरान विदित जग जाना ॥
अवधपुरी सरिस प्रिय नहिँ सोऊ । यह प्रसङ्ग जानइ कोउ कोऊ ॥

jadyapi saba baikuṃṭha bakhānā | beda purāna vidita jaga jānā ||
avadhapurī sarisa priya nahim̐ soū | yaha prasaṅga jānai kou koū ||

4.3

जन्मभूमि मम पुरी सुहावनि । उत्तर दिसि बह सरजू पावनि ॥
जा मज्जन ते बिनहिँ प्रयासा । मम समीप नर पावहिं बासा ॥

janmabhūmi mama purī suhāvani | uttara disi baha sarajū pāvani ||
jā majjana te binahim̐ prayāsā | mama samīpa nara pāvahiṃ bāsā ||

4.4

अति प्रिय मोहि इहाँ के बासी । मम धामदा पुरी सुख रासी ॥
हरषे सब कपि सुनि प्रभु बाली । धन्य अवध जो राम बखानी ॥

ati priya mohi ihām̐ ke bāsī | mama dhāmadā purī sukha rāsī ||
haraṣe saba kapi suni prabhu bālī | dhanya avadha jo rāma bakhānī ||

दो॰ 4 (क)दोहा

आवत देखि लोग सब, कृपासिन्धु भगवान ।
नगर निकट प्रभु प्रेरेउ, उतरेउ भूमि बिमान ॥

āvata dekhi loga saba, kṛpāsindhu bhagavāna |
nagara nikaṭa prabhu prereu, utareu bhūmi bimāna ||

दो॰ 4 (ख)दोहा

उतरि कहेउ प्रभु पुष्पकहि, तुम्ह कुबेर पहिँ जाहु ।
प्रेरित राम चलेउ, सो हरष बिरह अति ताहु ॥

utari kaheu prabhu puṣpakahi, tumha kubera pahim̐ jāhu |
prerita rāma caleu, so haraṣa biraha ati tāhu ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0