सुनु सर्बज्ञ कृपा सुख सिन्धो । दीन दयाकर आरत बंधो ॥
मरती बेर नाथ मोहि बाली । गयउ तुम्हारेहि कोंछें घाली ॥
sunu sarbajña kṛpā sukha sindho | dīna dayākara ārata baṃdho ||
maratī bera nātha mohi bālī | gayau tumhārehi koṃcheṃ ghālī ||
6 श्लोक · 18 में से 130
अंगद करुणासागर प्रभु से विनती करते हैं। मरते समय बाली मुझे आपकी गोद में डाल गए थे। अशरण-शरण होने का अपना विरद सँभालिए और मुझे मत त्यागिए। आप ही मेरे स्वामी, गुरु, पिता और माता हैं; चरण छोड़कर मैं कहाँ जाऊँ? प्रभु को छोड़कर घर में मेरा क्या काम? मैं ज्ञान और बल से हीन बालक हूँ। मुझे दीन सेवक बनाकर रखिए; घर की सब नीची सेवा करूँगा और चरणकमल देखकर भवसागर तर जाऊँगा। वे चरणों पर गिर पड़ते हैं: अब घर जाने को मत कहिए। रघुपति उन्हें उठाकर हृदय से लगाते हैं, नेत्र सजल हो जाते हैं। वे अपनी माला, वस्त्र और मणि बालिपुत्र को पहनाते हैं, और बहुत समझाकर विदा करते हैं।
सुनु सर्बज्ञ कृपा सुख सिन्धो । दीन दयाकर आरत बंधो ॥
मरती बेर नाथ मोहि बाली । गयउ तुम्हारेहि कोंछें घाली ॥
sunu sarbajña kṛpā sukha sindho | dīna dayākara ārata baṃdho ||
maratī bera nātha mohi bālī | gayau tumhārehi koṃcheṃ ghālī ||
असरन सरन बिरद सम्भारी । मोहि जनि तजहु भगत हितकारी ॥
मोरें तुम्ह प्रभु गुरु पितु माता । जाउँ कहाँ तजि पद-जलजाता ॥
asarana sarana birada sambhārī | mohi jani tajahu bhagata hitakārī ||
moreṃ tumha prabhu guru pitu mātā | jāum̐ kahām̐ taji pada-jalajātā ||
तुम्हहि बिचारि कहहु नरनाहा । प्रभु तजि भवन काज सम काहा ॥
बालक ज्ञान बुद्धि बल हीना । राखहु सरल नाथ जन दीना ॥
tumhahi bicāri kahahu naranāhā | prabhu taji bhavana kāja sama kāhā ||
bālaka jñāna buddhi bala hīnā | rākhahu sarala nātha jana dīnā ||
नीचि टहल गृह के सब करिहउँ । पद-पङ्कज बिलोकि भव तरिहउँ ॥
अस कहि चरन परेउ प्रभु पाही । अब जनि नाथ कहहु गृह जाही ॥
nīci ṭahala gṛha ke saba karihaum̐ | pada-paṅkaja biloki bhava tarihaum̐ ||
asa kahi carana pareu prabhu pāhī | aba jani nātha kahahu gṛha jāhī ||
अङ्गद बचन बिनीत सुनि, रघुपति करुना सीँव ।
प्रभु उठाइ उर लायउ, सजल नयन राजीव ॥
aṅgada bacana binīta suni, raghupati karunā sīm̐va |
prabhu uṭhāi ura lāyau, sajala nayana rājīva ||
निज उर माल बसन मनि बालितनय पहिराई ।
बिदा कीन्ह भगवान तब, बहु प्रकार समुझाइ ॥
nija ura māla basana mani bālitanaya pahirāī |
bidā kīnha bhagavāna taba, bahu prakāra samujhāi ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0