लछिमन बान सरासन आनू । सोषौं बारिधि बिसिख-कृसानू ॥
सठ सन बिनय कुटिल सन प्रीति । सहज कृपन सन सुन्दर नीती ॥
lachimana bāna sarāsana ānū | soṣauṃ bāridhi bisikha-kṛsānū ||
saṭha sana binaya kuṭila sana prīti | sahaja kṛpana sana sundara nītī ||
5 श्लोक · 58 में से 60
श्रीराम कहते हैं, लक्ष्मण, धनुष लाओ, अग्निबाण से समुद्र सोख लूँ। मूर्ख से विनय, कुटिल से प्रीति, ममता में डूबे से ज्ञान, लोभी से वैराग्य और कामी से हरिकथा, ये ऊसर में बोए बीज जैसे हैं। यह मत लक्ष्मण को भाता है। प्रभु भयानक बाण चढ़ाते हैं तो समुद्र के भीतर ज्वाला उठती है, मगर, साँप और मछलियाँ व्याकुल हो जाते हैं। जीवों को जलता जानकर समुद्र अभिमान छोड़ता है और ब्राह्मण रूप में मणियों से भरा सोने का थाल लेकर आता है। काकभुशुण्डि गरुड़ से कहते हैं, केला काटने पर ही फलता है, चाहे कितना सींचो, नीच विनय से नहीं, डाँटने पर ही झुकता है।
लछिमन बान सरासन आनू । सोषौं बारिधि बिसिख-कृसानू ॥
सठ सन बिनय कुटिल सन प्रीति । सहज कृपन सन सुन्दर नीती ॥
lachimana bāna sarāsana ānū | soṣauṃ bāridhi bisikha-kṛsānū ||
saṭha sana binaya kuṭila sana prīti | sahaja kṛpana sana sundara nītī ||
ममता रत सन ज्ञान कहानी । अति लोभी सन बिरति बखानी ॥
क्रोधिहि सम कामिहि हरि कथा । उसर बीज बये फल जथा ॥
mamatā rata sana jñāna kahānī | ati lobhī sana birati bakhānī ||
krodhihi sama kāmihi hari kathā | usara bīja baye phala jathā ||
अस कहि रघुपति चाप बढ़ावा । यह मत लछिमन के मन भावा ॥
संघानेउ प्रभु बिसिख कराला । उठी उदधि उर अन्तर ज्वाला ॥
asa kahi raghupati cāpa bar̤hāvā | yaha mata lachimana ke mana bhāvā ||
saṃghāneu prabhu bisikha karālā | uṭhī udadhi ura antara jvālā ||
मकर उरग झष-गन अकुलाने । जरत जन्तु जलनिधि जब जाने ॥
कनक थार भरि मनि गन नाना । बिप्र रूप आयउ तजि माना ॥
makara uraga jhaṣa-gana akulāne | jarata jantu jalanidhi jaba jāne ||
kanaka thāra bhari mani gana nānā | bipra rūpa āyau taji mānā ||
काटेहिं पै कदरी फरइ, कोटि जतन कोउ सींच ।
विनय न मान खगेस सुनु-डाटेहिं पै नव नीच ॥
kāṭehiṃ pai kadarī pharai, koṭi jatana kou sīṃca |
vinaya na māna khagesa sunu-ḍāṭehiṃ pai nava nīca ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0