राम तेज-बल-बुधि बिपुलाई । सेष सहस-सत सकहिँ न गाई ॥
सक सर एक सोखि सत सागर । तव भ्रातहि पूछेउ नय-नागर ॥
rāma teja-bala-budhi bipulāī | seṣa sahasa-sata sakahim̐ na gāī ||
saka sara eka sokhi sata sāgara | tava bhrātahi pūcheu naya-nāgara ||
7 श्लोक · 56 में से 60
दूत कहता है, लाखों शेष भी राम का बल नहीं गा सकते, उनका एक बाण सौ समुद्र सोख ले, फिर भी उन्होंने आपके भाई की सलाह ली और समुद्र से राह माँग रहे हैं। रावण हँसता है, स्वभाव का डरपोक उसी सलाह पर समुद्र के आगे मचल रहा है। मैंने उस शत्रु का बल नाप लिया जिसका मन्त्री डरपोक विभीषण है। खीझकर दूत पत्र निकालता है। रावण हँसकर बाएँ हाथ से लेता है और पढ़वाता है: दुष्ट, कुल का नाश मत कर, राम का शत्रु विष्णु, ब्रह्मा और शिव की शरण में भी नहीं बचेगा। या भाई की तरह प्रभु के चरणकमलों का भौंरा बन, या कुल सहित राम के बाणों की आग में पतंगा बन।
राम तेज-बल-बुधि बिपुलाई । सेष सहस-सत सकहिँ न गाई ॥
सक सर एक सोखि सत सागर । तव भ्रातहि पूछेउ नय-नागर ॥
rāma teja-bala-budhi bipulāī | seṣa sahasa-sata sakahim̐ na gāī ||
saka sara eka sokhi sata sāgara | tava bhrātahi pūcheu naya-nāgara ||
तासु बचन सुनि सागर पाहीँ । माँगत पन्थ कृपा मन माहीँ ॥
सुनत बचन बिहसा दससीसा । जौं असि मति सहाय कृत कीसा ॥
tāsu bacana suni sāgara pāhīm̐ | mām̐gata pantha kṛpā mana māhīm̐ ||
sunata bacana bihasā dasasīsā | jauṃ asi mati sahāya kṛta kīsā ||
सहज भीरु कर बचन दिढ़ाई । सागर सन ठानी मचलाई ॥
मूढ़ मृषा का करति बड़ाई । रिपु बल बुद्धि थाह मैं पाई ॥
sahaja bhīru kara bacana dir̤hāī | sāgara sana ṭhānī macalāī ||
mūr̤ha mṛṣā kā karati bar̤āī | ripu bala buddhi thāha maiṃ pāī ||
सचिव सभीत बिभीषन जाकें । विजय बिभूति कहाँ जग ताकें ॥
सुनि खल बचन दूत रिस बाढ़ी । समय बिचारि पत्रिका काढ़ी ॥
saciva sabhīta bibhīṣana jākeṃ | vijaya bibhūti kahām̐ jaga tākeṃ ||
suni khala bacana dūta risa bār̤hī | samaya bicāri patrikā kār̤hī ||
रामानुज दीन्ही यह पाती । नाथ बचाइ जुड़ावहु छाती ॥
बिहँसि बाम कर लीन्ही रावन । सचिव बोलि सठ लाग बचावन ॥
rāmānuja dīnhī yaha pātī | nātha bacāi jur̤āvahu chātī ||
biham̐si bāma kara līnhī rāvana | saciva boli saṭha lāga bacāvana ||
बातन्ह मनहिं रिझाइ सठ, जनि घालसि कुल खीस ।
राम बिरोध न उबरसि, सरन विष्नु अज ईस ॥
bātanha manahiṃ rijhāi saṭha, jani ghālasi kula khīsa |
rāma birodha na ubarasi, sarana viṣnu aja īsa ||
की तजि मान अनुज इव, प्रभु-पद-पङ्कज भृङ्ग ।
होइ कि राम सरानल, खल कुल सहित पतङ्ग ॥
kī taji māna anuja iva, prabhu-pada-paṅkaja bhṛṅga |
hoi ki rāma sarānala, khala kula sahita pataṅga ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0