सुन्दरकाण्ड

अध्याय 55: अठारह पद्म यूथपति वानर

5 श्लोक · 55 में से 60

इस अध्याय में क्या होता है

अठारह पद्म यूथपति वानर

दूत कहता है, ये सब सुग्रीव के समान बली हैं, राम की कृपा से वे तीनों लोकों को तिनका गिनते हैं। दशकन्धर, मैंने कानों से सुना है कि वानरों के यूथपति अठारह पद्म हैं। नाथ, उस सेना में ऐसा कोई वानर नहीं जो रण में आपको न जीत सके। सब अत्यन्त क्रोध से हाथ मलते हैं, पर रघुनाथ आज्ञा नहीं देते। वे कहते हैं, मछलियों और साँपों सहित समुद्र को सोख लेंगे, नहीं तो बड़े बड़े पर्वतों से भर देंगे, और रावण को मसलकर धूल में मिला देंगे। वे निडर गरजते हैं, मानो लंका को निगल जाएँगे। सब भालू और वानर स्वभाव से शूर हैं, फिर सिर पर प्रभु राम हैं, वे रण में रावण के करोड़ों कालों को भी जीत सकते हैं।

55.1

ये कपि सब सुग्रीव समाना । इन्ह सम कोटिन्ह गनइ को नाना ॥
राम कृपाँ अतुलित बल तिन्हहीँ । तृन समान त्रेलोकहि गनहीं ॥

ye kapi saba sugrīva samānā | inha sama koṭinha ganai ko nānā ||
rāma kṛpām̐ atulita bala tinhahīm̐ | tṛna samāna trelokahi ganahīṃ ||

55.2

अस मैं सुना स्रवन सुना दसकन्धर । पदुम अठारह जूथप बन्दर ॥
नाथ कटक महँ सो कपि नाहीँ । जो न तुम्हहिँ जीतै रन माहीं ॥

asa maiṃ sunā sravana sunā dasakandhara | paduma aṭhāraha jūthapa bandara ||
nātha kaṭaka maham̐ so kapi nāhīm̐ | jo na tumhahim̐ jītai rana māhīṃ ||

55.3

परम क्रोध मीजहिँ सब हाथा । आयसु पै न देहिँ रघुनाथा ॥
सोखहिँ सिन्धु सहित झष ब्याला । पूरहिँ न त भरि कुधर बिसाला ॥

parama krodha mījahim̐ saba hāthā | āyasu pai na dehim̐ raghunāthā ||
sokhahim̐ sindhu sahita jhaṣa byālā | pūrahim̐ na ta bhari kudhara bisālā ||

55.4

मर्दि गर्द मिलवहिँ दससीसा । ऐसइ बचन कहहिँ सब कीसा ॥
गर्जहिँ तर्जहिँ सहज असङ्का । मानहुँ ग्रसन चहत हहिँ लङ्का ॥

mardi garda milavahim̐ dasasīsā | aisai bacana kahahim̐ saba kīsā ||
garjahim̐ tarjahim̐ sahaja asaṅkā | mānahum̐ grasana cahata hahim̐ laṅkā ||

दो॰ 55दोहा

सहज सूर कपि भालु सब, पुनि सिर पर प्रभु राम ।
रावन काल कोटि कहँ, जीति सकहिँ संग्राम ॥

sahaja sūra kapi bhālu saba, puni sira para prabhu rāma |
rāvana kāla koṭi kaham̐, jīti sakahim̐ saṃgrāma ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0