तुरत नाइ लछिमन पद माथा । चले दूत बरनत गुन-गाथा ॥
कहत राम जस लंकाँ आये । रावन चरन सीस तिन्ह नाये ॥
turata nāi lachimana pada māthā | cale dūta baranata guna-gāthā ||
kahata rāma jasa laṃkām̐ āye | rāvana carana sīsa tinha nāye ||
5 श्लोक · 53 में से 60
लक्ष्मण के चरणों में तुरन्त सिर नवाकर दूत राम के गुणों की गाथा कहते हुए चलते हैं, लंका पहुँचकर रावण के चरणों में सिर नवाते हैं। रावण हँसकर पूछता है, शुक, अपना कुशल क्यों नहीं कहता? फिर विभीषण की खबर बता, जिसकी मृत्यु बहुत निकट आ गई है। वह मूर्ख राज करते हुए लंका छोड़ गया, अभागा जौ के साथ पिसने वाले घुन जैसा होगा। फिर भालू वानरों की उस सेना की बात कह, जिसे काल यहाँ ले आया है, जिनके प्राणों का रखवाला बेचारा कोमल चित्त समुद्र बना है। फिर उन तपस्वियों की बात कह, जिनके हृदय में मेरा बड़ा डर है। उनसे भेंट हुई या मेरा सुयश सुनकर वे लौट गए? शत्रु सेना का तेज और बल क्यों नहीं बताता? तेरा चित्त बहुत चकित दिखता है।
तुरत नाइ लछिमन पद माथा । चले दूत बरनत गुन-गाथा ॥
कहत राम जस लंकाँ आये । रावन चरन सीस तिन्ह नाये ॥
turata nāi lachimana pada māthā | cale dūta baranata guna-gāthā ||
kahata rāma jasa laṃkām̐ āye | rāvana carana sīsa tinha nāye ||
बिहँसि दसानन पूछी बाता । कहसि न सुक आपनि कुसलाता ॥
पुनि कहु खबरि बिभीषन केरी । जाहिं मृत्यु आई अति नेरी ॥
biham̐si dasānana pūchī bātā | kahasi na suka āpani kusalātā ||
puni kahu khabari bibhīṣana kerī | jāhiṃ mṛtyu āī ati nerī ||
करत राज लङ्का सठ त्यागी । होइहि जब कर कीट अभागी ॥
पुनि कहु भालु-कीस कटकाई । कठिन काल प्रेरित चलि आई ॥
karata rāja laṅkā saṭha tyāgī | hoihi jaba kara kīṭa abhāgī ||
puni kahu bhālu-kīsa kaṭakāī | kaṭhina kāla prerita cali āī ||
जिन्ह के जीवन कर रखवारा । भयउ मृदुल चित सिन्धु बिचारा ॥
कहु तपसिन्ह के बात बहोरी । जिन्ह के हृदयँ त्रास अति मोरी ॥
jinha ke jīvana kara rakhavārā | bhayau mṛdula cita sindhu bicārā ||
kahu tapasinha ke bāta bahorī | jinha ke hṛdayam̐ trāsa ati morī ||
की भइ भेंट कि फिरि गये, श्रवन सुजस सुनि मोर ।
कहसि न रिपु दल तेज बल, बहुत चकित चित तोर ॥
kī bhai bheṃṭa ki phiri gaye, śravana sujasa suni mora |
kahasi na ripu dala teja bala, bahuta cakita cita tora ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0