बुध-पुरान-स्रुति-सम्मत बानी । कही बिभीषन नीति बखानी ॥
सुनत दसानन उठा रिसाई । खल तोहि निकट मृत्यु अब आई ॥
budha-purāna-sruti-sammata bānī | kahī bibhīṣana nīti bakhānī ||
sunata dasānana uṭhā risāī | khala tohi nikaṭa mṛtyu aba āī ||
6 श्लोक · 41 में से 60
विभीषण ने विद्वानों, पुराणों और श्रुति के अनुकूल नीति कही, पर मृत्यु निकट होने से रावण क्रोध में उठता है। मूर्ख, तू मेरे जिलाए जीता है और शत्रु का पक्ष लेता है। मेरे नगर में रहकर तपस्वियों से प्रीति करता है, जा उन्हीं को नीति सुना। वह भाई को लात मारता है, और छोटा भाई बार बार उसके चरण पकड़ता है। शिवजी कहते हैं, उमा, सन्त की यही बड़ाई है कि बुरा करने वाले का भी भला करते हैं। मन्त्रियों सहित आकाश मार्ग से जाते हुए विभीषण कहते हैं, राम सत्यसंकल्प प्रभु हैं, तुम्हारी सभा काल के वश है, मैं रघुवीर की शरण जाता हूँ, मुझे दोष मत देना।
बुध-पुरान-स्रुति-सम्मत बानी । कही बिभीषन नीति बखानी ॥
सुनत दसानन उठा रिसाई । खल तोहि निकट मृत्यु अब आई ॥
budha-purāna-sruti-sammata bānī | kahī bibhīṣana nīti bakhānī ||
sunata dasānana uṭhā risāī | khala tohi nikaṭa mṛtyu aba āī ||
जिअसि सदा सठ मोर जिआवा । रिपु कर पच्छ मूढ़ तोहि भावा ॥
कहसि न खल अस को जग माहीँ । भुज बल जाहि जिता मैं नाहीं ॥
jiasi sadā saṭha mora jiāvā | ripu kara paccha mūr̤ha tohi bhāvā ||
kahasi na khala asa ko jaga māhīm̐ | bhuja bala jāhi jitā maiṃ nāhīṃ ||
मम पुर बसि तपसिन्ह पर प्रीती । सठ मिलु जाइ तिन्हहिँ कहु नीती ॥
अस कहि कीन्हेसि चरन प्रहारा । अनुज गहे पद बारहिँ बारा ॥
mama pura basi tapasinha para prītī | saṭha milu jāi tinhahim̐ kahu nītī ||
asa kahi kīnhesi carana prahārā | anuja gahe pada bārahim̐ bārā ||
उमा सन्त कइ इहइ बड़ाई । मन्द करत जो करई भलाई ॥
तुम्ह पितु-सरिस भलेहिं मोहि मारा । अस कहि कीन्हेसि चरन प्रहारा ॥
umā santa kai ihai bar̤āī | manda karata jo karaī bhalāī ||
tumha pitu-sarisa bhalehiṃ mohi mārā | asa kahi kīnhesi carana prahārā ||
सचिव सङ्ग लेइ नभ-पथ गयऊ । सबहि सुनाइ कहत अस भयऊ ॥
saciva saṅga lei nabha-patha gayaū | sabahi sunāi kahata asa bhayaū ||
राम सत्यसङ्कल्प प्रभु, सभा काल-बस तोरि ।
मैं रघुबीर सरन अब, जाउँ देहु जनि खोरि ॥
rāma satyasaṅkalpa prabhu, sabhā kāla-basa tori |
maiṃ raghubīra sarana aba, jāum̐ dehu jani khori ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0