तात राम नहिँ नर भूपाला । भुवनेश्वर कालहु कर काला ॥
ब्रह्म अनामय अज भगवन्ता । व्यापक अजित अनादि अनन्ता ॥
tāta rāma nahim̐ nara bhūpālā | bhuvaneśvara kālahu kara kālā ||
brahma anāmaya aja bhagavantā | vyāpaka ajita anādi anantā ||
6 श्लोक · 39 में से 60
विभीषण कहते हैं, तात, राम मनुष्यों के राजा मात्र नहीं। वे भुवनों के ईश्वर, काल के भी काल, ब्रह्म, अजन्मा, व्यापक, अनादि और अनन्त भगवान हैं। गौ, ब्राह्मण, पृथ्वी और देवताओं के हित के लिए कृपासिन्धु ने मनुष्य शरीर धरा है, वेद और धर्म की रक्षा और दुष्टों के नाश के लिए। बैर छोड़कर रघुनाथ को सिर नवाइए और उन्हें वैदेही दे दीजिए। संसार भर से द्रोह करने वाला भी शरण जाए तो प्रभु उसे नहीं त्यागते। जिनका नाम तीनों तापों को मिटाता है, वही प्रभु प्रकट हुए हैं। मैं बार बार चरणों में पड़ता हूँ, अभिमान छोड़कर कोसलपति को भजिए। मुनि पुलस्त्य ने शिष्य से यह बात कहला भेजी थी, अवसर पाते ही मैंने कह दी।
तात राम नहिँ नर भूपाला । भुवनेश्वर कालहु कर काला ॥
ब्रह्म अनामय अज भगवन्ता । व्यापक अजित अनादि अनन्ता ॥
tāta rāma nahim̐ nara bhūpālā | bhuvaneśvara kālahu kara kālā ||
brahma anāmaya aja bhagavantā | vyāpaka ajita anādi anantā ||
गो द्विज धेनु देव हितकारी । कृपासिन्धु मानुष तनु धारी ॥
जन रञ्जन सज्जन खल ब्राता । बेद-धर्म रच्छक सुनु भ्राता ॥
go dvija dhenu deva hitakārī | kṛpāsindhu mānuṣa tanu dhārī ||
jana rañjana sajjana khala brātā | beda-dharma racchaka sunu bhrātā ||
ताहि बयरु तजि नाइअ माथा । प्रनतारति भञ्जन रघुनाथा ॥
देहु नाथ प्रभु कह बैदेही । भजहु राम बिनु हेतु सनेही ॥
tāhi bayaru taji nāia māthā | pranatārati bhañjana raghunāthā ||
dehu nātha prabhu kaha baidehī | bhajahu rāma binu hetu sanehī ||
सरन गये प्रभु ताहु न त्यागा । बिस्व-द्रोह-कृत अघ जेहि लागा ॥
जासु नाम त्रय ताप नसावन । सोइ प्रभु प्रगट समुझु जियँ रावन ॥
sarana gaye prabhu tāhu na tyāgā | bisva-droha-kṛta agha jehi lāgā ||
jāsu nāma traya tāpa nasāvana | soi prabhu pragaṭa samujhu jiyam̐ rāvana ||
बार बार पद लागउँ, बिनय करउँ दससीस ।
परिहरि मान-मोह-मद, भजहु कोसलाधीस ॥
bāra bāra pada lāgaum̐, binaya karaum̐ dasasīsa |
parihari māna-moha-mada, bhajahu kosalādhīsa ||
मुनि पुलस्ति निज सिष्य सन, कहि पठई यह बात ।
तुरत सो मैं प्रभु सन कही, पाइ सुअवसर तात ॥
muni pulasti nija siṣya sana, kahi paṭhaī yaha bāta |
turata so maiṃ prabhu sana kahī, pāi suavasara tāta ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0