स्रवन सुनी सठ ता करि बानी । बिहसा जगत बिदित अभिमानी ॥
सभय सुभाउ नारि कर साचा । मङ्गल महुँ भय मन अति काचा ॥
sravana sunī saṭha tā kari bānī | bihasā jagata bidita abhimānī ||
sabhaya subhāu nāri kara sācā | maṅgala mahum̐ bhaya mana ati kācā ||
6 श्लोक · 37 में से 60
रावण हँसकर कहता है, स्त्री का स्वभाव ही डरपोक होता है, मंगल में भी उसका मन डरता है। बन्दर आएँगे तो राक्षसों का भोजन बनेंगे। जिसके डर से लोकपाल काँपते हैं, उसकी पत्नी डरे, यह हँसी की बात है। वह उसे गले लगाकर सभा में चला जाता है, और मन्दोदरी चिन्ता करती है कि पति पर विधाता उल्टा है। खबर आती है कि सारी सेना समुद्र पार आ गई। वह मन्त्रियों से सलाह माँगता है, वे हँसकर कहते हैं, आपने देवता और असुर बिना श्रम जीते, मनुष्य और बन्दर किस गिनती में? दोहा चेताता है, मन्त्री, वैद्य और गुरु जब भय या लोभ से प्रिय ही बोलें, तो राज्य, धर्म और शरीर शीघ्र नष्ट होते हैं।
स्रवन सुनी सठ ता करि बानी । बिहसा जगत बिदित अभिमानी ॥
सभय सुभाउ नारि कर साचा । मङ्गल महुँ भय मन अति काचा ॥
sravana sunī saṭha tā kari bānī | bihasā jagata bidita abhimānī ||
sabhaya subhāu nāri kara sācā | maṅgala mahum̐ bhaya mana ati kācā ||
जौँ आवइ मरकट कटकाई । जिअहिं बिचारे निसिचर खाई ॥
कंपहिं लोकप जाकी त्रासा । तासु नारि सभीत बड़ि हासा ॥
jaum̐ āvai marakaṭa kaṭakāī | jiahiṃ bicāre nisicara khāī ||
kaṃpahiṃ lokapa jākī trāsā | tāsu nāri sabhīta bar̤i hāsā ||
असकहि बिहँसि ताहि उर लाई । चलेउ सभाँ ममता अधिकाई ॥
मन्दोदरी हृदयँ कर चिन्ता । भयउ कन्त पर निधि बिपरीता ॥
asakahi biham̐si tāhi ura lāī | caleu sabhām̐ mamatā adhikāī ||
mandodarī hṛdayam̐ kara cintā | bhayau kanta para nidhi biparītā ||
बैठेउ सभाँ खबरि असि पाई । सिन्धु पार सेना सब आई ॥
बूझेसि सचिव उचित मत कहहू । ते सब हँसे मष्ट करि रहहू ॥
baiṭheu sabhām̐ khabari asi pāī | sindhu pāra senā saba āī ||
būjhesi saciva ucita mata kahahū | te saba ham̐se maṣṭa kari rahahū ||
जितेहु सुरासुर तब श्रम नाहीँ । नर बानर केहि लेखे माहीं ॥
jitehu surāsura taba śrama nāhīm̐ | nara bānara kehi lekhe māhīṃ ||
सचिव बैद गुरु तीनि जौँ, प्रिय बोलहिँ भय आस ।
राज धर्म तन तीनि कर, होइ बेगिहीं नास ॥
saciva baida guru tīni jaum̐, priya bolahim̐ bhaya āsa |
rāja dharma tana tīni kara, hoi begihīṃ nāsa ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0