सुन्दरकाण्ड

अध्याय 21: हनुमान रावण को अपने स्वामी बताते हैं

6 श्लोक · 21 में से 60

इस अध्याय में क्या होता है

हनुमान रावण को अपने स्वामी बताते हैं

रावण पूछता है, बन्दर, तू कौन है, किसके बल पर तूने वन उजाड़ा और राक्षस मारे? क्या तूने मेरा नाम नहीं सुना? हनुमान कहते हैं, रावण, सुनो। जिनके बल से माया अनगिनत ब्रह्माण्ड रचती है, जिनके बल से ब्रह्मा, हरि और महेश सृष्टि, पालन और संहार करते हैं, जिनके बल से शेषनाग ब्रह्माण्ड को सिर पर धरते हैं, जो देवताओं की रक्षा और तुम जैसे मूर्खों को सीख देने के लिए देह धरते हैं, जिन्होंने शिव का धनुष तोड़कर तुम्हारे सहित राजाओं का मद चूर किया, जिन्होंने खर, दूषण, त्रिशिरा और बालि को मारा, जिनके बल के लेश से तुमने चराचर जीता, मैं उन्हीं का दूत हूँ जिनकी प्रिय पत्नी तुम हर लाए।

21.1

कह लङ्केस कवन तैँ कीसा । केहिं के बल घालेहि बन खीसा ॥
की धौं स्रवन सुनेहि नहिं मोही । देखउँ अति असङ्क सठ तोही ॥

kaha laṅkesa kavana taim̐ kīsā | kehiṃ ke bala ghālehi bana khīsā ||
kī dhauṃ sravana sunehi nahiṃ mohī | dekhaum̐ ati asaṅka saṭha tohī ||

21.2

मारे निसिचर केहिं अपराधा । कहु सठ तोहि न प्रान कै बाधा ॥
सुनु रावन ब्रह्मांड निकाया । पाइ जासु बल बिरचित माया ॥

māre nisicara kehiṃ aparādhā | kahu saṭha tohi na prāna kai bādhā ||
sunu rāvana brahmāṃḍa nikāyā | pāi jāsu bala biracita māyā ||

21.3

जाकें बल बिरञ्चि हरि ईसा । पालत सृजत हरत दससीसा ॥
जा बल सीस धरत सहसानन । अंडकोस समेत गिरि कानन ॥

jākeṃ bala birañci hari īsā | pālata sṛjata harata dasasīsā ||
jā bala sīsa dharata sahasānana | aṃḍakosa sameta giri kānana ||

21.4

धरइ जो विविध देह सुर-त्राता । तुम्ह से सठन्ह सिखावनु दाता ॥
हर-कोदंड कठिन जेहि भंजा । तोहि समेत नृप-दल मद गंजा ॥

dharai jo vividha deha sura-trātā | tumha se saṭhanha sikhāvanu dātā ||
hara-kodaṃḍa kaṭhina jehi bhaṃjā | tohi sameta nṛpa-dala mada gaṃjā ||

21.5

खर दूषन त्रिसिरा अरु बाली । बधे सकल अतुलित बल-साली ॥

khara dūṣana trisirā aru bālī | badhe sakala atulita bala-sālī ||

दो॰ 21दोहा

जाके बल लवलेस तैं, जितेहु चराचर झारि ।
तासु दूत मैं जा करि, हरि आनेहु प्रिय नारि ॥

jāke bala lavalesa taiṃ, jitehu carācara jhāri |
tāsu dūta maiṃ jā kari, hari ānehu priya nāri ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0