जात पवन सुत देवन्ह देखा । जानइ कहँ बल बुद्धि बिसेखा ॥
सुरसा नाम अहिन्ह कै माता । पठइन्हि आइ कही तेहिं बाता ॥
jāta pavana suta devanha dekhā | jānai kaham̐ bala buddhi bisekhā ||
surasā nāma ahinha kai mātā | paṭhainhi āi kahī tehiṃ bātā ||
7 श्लोक · 2 में से 60
देवता हनुमान के बल और बुद्धि की थाह लेना चाहते हैं, इसलिए सर्पों की माता सुरसा को भेजते हैं। वह कहती है, आज देवताओं ने मुझे तुम्हें भोजन के रूप में दिया है। हनुमान विनय से कहते हैं, माता, रामकाज करके और प्रभु को सीता का समाचार सुनाकर मैं स्वयं आकर तुम्हारे मुख में प्रवेश करूँगा, अभी जाने दो। वह नहीं मानती। वह एक योजन मुँह फैलाती है तो कपि दो योजन के हो जाते हैं, सोलह पर बत्तीस के, सदा उसके दूने। सौ योजन के मुख पर वे बहुत छोटे होकर भीतर जाते हैं, बाहर आते हैं और सिर नवाकर विदा माँगते हैं। सुरसा कहती है कि मैंने तुम्हारे बल बुद्धि का भेद पा लिया, तुम सब रामकाज करोगे, और आशीष देकर चली जाती है।
जात पवन सुत देवन्ह देखा । जानइ कहँ बल बुद्धि बिसेखा ॥
सुरसा नाम अहिन्ह कै माता । पठइन्हि आइ कही तेहिं बाता ॥
jāta pavana suta devanha dekhā | jānai kaham̐ bala buddhi bisekhā ||
surasā nāma ahinha kai mātā | paṭhainhi āi kahī tehiṃ bātā ||
आजु सुरन्ह मोहि दीन्ह अहारा । सुनत बचन कहें पवन-कुमारा ॥
राम-काज करि फिरि में आवउँ । सीता कै सुधि प्रभुहि सुनावउँ ॥
āju suranha mohi dīnha ahārā | sunata bacana kaheṃ pavana-kumārā ||
rāma-kāja kari phiri meṃ āvaum̐ | sītā kai sudhi prabhuhi sunāvaum̐ ||
तब तव बदन पैठिहउँ आई । सत्य कहउँ मोहि जान दे माई ॥
कवनेहुँ जतन देइ नहिं जाना । ग्रससि न मोहि कहेउ हनुमाना ॥
taba tava badana paiṭhihaum̐ āī | satya kahaum̐ mohi jāna de māī ||
kavanehum̐ jatana dei nahiṃ jānā | grasasi na mohi kaheu hanumānā ||
जोजन भरि तेहिं बदन पसारा । कपि तनु कीन्ह दुगुन विस्तारा ॥
सोरह जोजन मुख तेहिं ठयऊ । तुरत पवन-सुत बत्तिस भयऊ ॥
jojana bhari tehiṃ badana pasārā | kapi tanu kīnha duguna vistārā ||
soraha jojana mukha tehiṃ ṭhayaū | turata pavana-suta battisa bhayaū ||
जस जस सुरसा बदन बढ़ावा । तासु दून कपि रूप देखावा ॥
सत जोजन तेहिं आनन कीन्हा । अति लघु रूप पवन-सुत लीन्हा ॥
jasa jasa surasā badana bar̤hāvā | tāsu dūna kapi rūpa dekhāvā ||
sata jojana tehiṃ ānana kīnhā | ati laghu rūpa pavana-suta līnhā ||
बदन पइठि पुनि बाहेर आवा । माँगा बिदा ताहि सिर नावा ॥
मोहि सुरन्ह जेहि लागि पठावा । बुधि-बल-मरम तोर मैं पावा ॥
badana paiṭhi puni bāhera āvā | mām̐gā bidā tāhi sira nāvā ||
mohi suranha jehi lāgi paṭhāvā | budhi-bala-marama tora maiṃ pāvā ||
राम काजु सब करिहहु, तुम्ह बल-बुद्धि-निधान ।
आसिष देइ गई सो, हरषि चलेउ हनुमान ॥
rāma kāju saba karihahu, tumha bala-buddhi-nidhāna |
āsiṣa dei gaī so, haraṣi caleu hanumāna ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0