चलेउ नाइ सिर पैठेउ बागा । फल खाएसि तरु तोरैं लागा ॥
रहे तहाँ बहु भट रखवारे । कछु मारेसि कछु जाइ पुकारे ॥
caleu nāi sira paiṭheu bāgā | phala khāesi taru toraiṃ lāgā ||
rahe tahām̐ bahu bhaṭa rakhavāre | kachu māresi kachu jāi pukāre ||
5 श्लोक · 18 में से 60
सिर नवाकर हनुमान बाग में जाते हैं, फल खाते हैं और पेड़ तोड़ने लगते हैं। कुछ रखवालों को मारते हैं, कुछ रावण के पास जाकर पुकारते हैं: नाथ, एक भारी वानर ने अशोक वाटिका उजाड़ दी, फल खा लिए, पेड़ उखाड़ दिए और रखवालों को मसल डाला। रावण योद्धा भेजता है, कपि गरजकर सबको मार देते हैं, कुछ अधमरे भागते हैं। फिर अपार सेना लेकर अक्षयकुमार आता है। कपि पेड़ उठाकर ललकारते हैं, उसे गिराकर भारी गर्जना करते हैं। कुछ को मारा, कुछ को मसला, कुछ को धूल में मिलाया, और बचे हुए जाकर पुकारते हैं: प्रभु, यह बन्दर बड़ा बलवान है।
चलेउ नाइ सिर पैठेउ बागा । फल खाएसि तरु तोरैं लागा ॥
रहे तहाँ बहु भट रखवारे । कछु मारेसि कछु जाइ पुकारे ॥
caleu nāi sira paiṭheu bāgā | phala khāesi taru toraiṃ lāgā ||
rahe tahām̐ bahu bhaṭa rakhavāre | kachu māresi kachu jāi pukāre ||
नाथ एक आवा कपि भारी । तेहिं असोक बाटिका उजारी ॥
खाएसि फल अरु बिटप उपारे । रच्छक मर्दि मर्दि महि डारे ॥
nātha eka āvā kapi bhārī | tehiṃ asoka bāṭikā ujārī ||
khāesi phala aru biṭapa upāre | racchaka mardi mardi mahi ḍāre ||
सुनि रावन पठये भट नाना । तिन्हहिँ देखि गर्जेउ हनुमाना ॥
सब रजनीचर कपि सङ्घारे । गये पुकारत कछु अधमारे ॥
suni rāvana paṭhaye bhaṭa nānā | tinhahim̐ dekhi garjeu hanumānā ||
saba rajanīcara kapi saṅghāre | gaye pukārata kachu adhamāre ||
पुनि पठयउ तेहिं अच्छकुमारा । चला सङ्ग लै सुभट अपारा ॥
आवत देखि बिटप गहि तर्जा । ताहि निपाति महाधुनि गर्जा ॥
puni paṭhayau tehiṃ acchakumārā | calā saṅga lai subhaṭa apārā ||
āvata dekhi biṭapa gahi tarjā | tāhi nipāti mahādhuni garjā ||
कछु मारेसि कछु मर्देसि, कछु मिलएसि धरि धूरि ।
कछु पुनि जाइ पुकारे, प्रभु मर्कट बल-भूरि ॥
kachu māresi kachu mardesi, kachu milaesi dhari dhūri |
kachu puni jāi pukāre, prabhu markaṭa bala-bhūri ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0