अन्तरधान भयउ छन एका । पुनि प्रगटे खल रूप अनेका ॥
रघुपति कटक भालु कपि जेते । जहँ तहाँ प्रगट दसानन तेते ॥
antaradhāna bhayau chana ekā | puni pragaṭe khala rūpa anekā ||
raghupati kaṭaka bhālu kapi jete | jaham̐ tahām̐ pragaṭa dasānana tete ||
6 श्लोक · 96 में से 121
रावण क्षण भर के लिए अन्तर्धान होता है और फिर अनेक रूपों में प्रकट होता है। रघुनाथ की सेना में जितने भालू-वानर हैं, उतने ही रावण जहाँ-तहाँ प्रकट हो जाते हैं। वानर अनगिनत दशशीश देखकर भागते हैं और पुकारते हैं: त्राहि, लक्ष्मण, त्राहि, रघुवीर। देवता भी डरकर भागते हैं: भाई, अब जय की आशा छोड़ो; एक रावण ने सब देवताओं को जीत लिया था, अब तो बहुत हैं, चलो पर्वतों की गुफाओं में छिपें। केवल ब्रह्मा, शम्भु और वे ज्ञानी मुनि निर्भय रहते हैं, जो प्रभु की महिमा कुछ जानते हैं। हनुमान, अंगद, नील और नल डटकर लड़ते हैं। देवताओं को व्याकुल देख कोसलपति हँसते हैं और शार्ङ्ग धनुष पर एक ही बाण चढ़ाकर सारे रावणों को मार गिराते हैं।
अन्तरधान भयउ छन एका । पुनि प्रगटे खल रूप अनेका ॥
रघुपति कटक भालु कपि जेते । जहँ तहाँ प्रगट दसानन तेते ॥
antaradhāna bhayau chana ekā | puni pragaṭe khala rūpa anekā ||
raghupati kaṭaka bhālu kapi jete | jaham̐ tahām̐ pragaṭa dasānana tete ||
देखे कपिन्ह अमित दससीसा । जहँ तहँ भजे भालु अरु कीसा ॥
भागे बानर धरहिँ न धीरा । त्राहि त्राहि लछिमन रघुबीरा ॥
dekhe kapinha amita dasasīsā | jaham̐ taham̐ bhaje bhālu aru kīsā ||
bhāge bānara dharahim̐ na dhīrā | trāhi trāhi lachimana raghubīrā ||
दहँ-दिसि धावहिँ कोटिन्ह रावन । गर्जहिं घोर कठोर भयावन ॥
डरे सकल सुर चले पराई । जय के आस तजहु अब भाई ॥
daham̐-disi dhāvahim̐ koṭinha rāvana | garjahiṃ ghora kaṭhora bhayāvana ||
ḍare sakala sura cale parāī | jaya ke āsa tajahu aba bhāī ||
सब सुर जिते एक दसकन्धर । अब बहु भए तकहु गिरि कन्दर ॥
रहे बिरञ्चि सम्भु मुनि ज्ञानी । जिन्ह जिन्ह प्रभु महिमा कछु जानी ॥
saba sura jite eka dasakandhara | aba bahu bhae takahu giri kandara ||
rahe birañci sambhu muni jñānī | jinha jinha prabhu mahimā kachu jānī ||
जाना प्रताप ते रहे निर्भय, कपिन्ह रिपु माने फुरे ।
चले बिचलि मर्कट भालु सकल, कृपाल पाहि भयातुरे ॥
हनुमन्त अङ्गद नील नल अति, बल लरत रन बाँकुरे ।
मर्दहिं दसानन कोटि कोटिन्ह, कपट-भू भट-अङ्कुरे ॥
jānā pratāpa te rahe nirbhaya, kapinha ripu māne phure |
cale bicali markaṭa bhālu sakala, kṛpāla pāhi bhayāture ||
hanumanta aṅgada nīla nala ati, bala larata rana bām̐kure |
mardahiṃ dasānana koṭi koṭinha, kapaṭa-bhū bhaṭa-aṅkure ||
सुर बानर देखे विकल, हँस्यो कोसलाधीस ।
सजि सारङ्ग एक सर, हते सकल दससीस ॥
sura bānara dekhe vikala, ham̐syo kosalādhīsa |
saji sāraṅga eka sara, hate sakala dasasīsa ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0