जानु टेकि कपि भूमि न गिरा । उठा सँभारि बहुत रिस भरा ॥
मुठिका एक ताहि कपि भारा । परेउ सैल जनु बज्र प्रहारा ॥
jānu ṭeki kapi bhūmi na girā | uṭhā sam̐bhāri bahuta risa bharā ||
muṭhikā eka tāhi kapi bhārā | pareu saila janu bajra prahārā ||
6 श्लोक · 84 में से 121
हनुमान घुटना टेककर रह जाते हैं, धरती पर नहीं गिरते। उठकर वे रावण को ऐसा घूँसा मारते हैं कि वह वज्र से मारे पर्वत की तरह गिर पड़ता है। होश में आकर वह वानर की सराहना करता है; हनुमान कहते हैं: धिक्कार है मेरे बल को, कि तू अब भी जीवित है। हनुमान लक्ष्मण को प्रभु के पास लाते हैं। रघुवीर कहते हैं: भाई, मन में समझो, तुम काल को भी खाने वाले और देवताओं के रक्षक हो। लक्ष्मण उठ बैठते हैं, शक्ति आकाश में लौट जाती है, और वे दौड़कर रथ तोड़ते हैं और रावण का हृदय बाणों से बेध देते हैं। दूसरा सारथी उसे लंका ले जाता है। उधर रावण राम पर विजय की आशा में यज्ञ करने लगता है।
जानु टेकि कपि भूमि न गिरा । उठा सँभारि बहुत रिस भरा ॥
मुठिका एक ताहि कपि भारा । परेउ सैल जनु बज्र प्रहारा ॥
jānu ṭeki kapi bhūmi na girā | uṭhā sam̐bhāri bahuta risa bharā ||
muṭhikā eka tāhi kapi bhārā | pareu saila janu bajra prahārā ||
मुरछा गै बहोरि से जागा । कपि बल बिपुल सराहन लागा ॥
धिग धिग मम पौरुष धिग मोही । जौँ तैं जिअत रहेसि सुरद्रोही ॥
murachā gai bahori se jāgā | kapi bala bipula sarāhana lāgā ||
dhiga dhiga mama pauruṣa dhiga mohī | jaum̐ taiṃ jiata rahesi suradrohī ||
अस कहि लछिमन कहँ कपि ल्यायो । देखि दसानन बिसमय पायो ॥
कह रघुबीर समुझु जियँ भ्राता । तुम्ह कृतान्त भच्छक सुर त्राता ॥
asa kahi lachimana kaham̐ kapi lyāyo | dekhi dasānana bisamaya pāyo ||
kaha raghubīra samujhu jiyam̐ bhrātā | tumha kṛtānta bhacchaka sura trātā ||
सुनत बचन उठि बैठ कृपाला । गई गगन सो सक्ति कराला ॥
पुनि कोदंड बान गहि धाये । रिपु सनमुख अति आतुर आये ॥
sunata bacana uṭhi baiṭha kṛpālā | gaī gagana so sakti karālā ||
puni kodaṃḍa bāna gahi dhāye | ripu sanamukha ati ātura āye ||
आतुर बहोरि बिभंजि स्यन्दन, सूत हति व्याकुल कियो ।
गिर्यो धरनि दसकन्धर बिकलतर, बान सत बेध्यो हियो ॥
सारथी दूसर घालि रथ तेहि, तुरत लङ्का, लेइ गयो ।
रघुबीर बन्धु प्रताप पुञ्ज बहोरि, प्रभु चरनन्हि नयो ॥
ātura bahori bibhaṃji syandana, sūta hati vyākula kiyo |
giryo dharani dasakandhara bikalatara, bāna sata bedhyo hiyo ||
sārathī dūsara ghāli ratha tehi, turata laṅkā, lei gayo |
raghubīra bandhu pratāpa puñja bahori, prabhu carananhi nayo ||
उहाँ दसानन जागि करि, करै लाग कछु जज्ञ ।
राम विरोध विजय चह, सठ हठ-बस अति-अज्ञ ॥
uhām̐ dasānana jāgi kari, karai lāga kachu jajña |
rāma virodha vijaya caha, saṭha haṭha-basa ati-ajña ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0