लंकाकाण्ड

अध्याय 83: ब्रह्मा की दी शक्ति से लक्ष्मण का गिरना

6 श्लोक · 83 में से 121

इस अध्याय में क्या होता है

ब्रह्मा की दी शक्ति से लक्ष्मण का गिरना

रावण लक्ष्मण से कहता है: इन वानर-भालुओं से क्या होगा? मुझे देख। पुत्र-घाती, मैं तुझे ही खोज रहा था; आज तुझे मारकर छाती ठण्डी करूँगा। वह प्रचण्ड बाण छोड़ता है, लक्ष्मण सबके टुकड़े कर देते हैं। फिर लक्ष्मण रथ तोड़कर सारथी को मारते हैं और उसके सिरों और छाती को बाणों से भर देते हैं। रावण बेसुध होकर धरती पर गिर पड़ता है। होश आने पर वह ब्रह्मा की दी हुई शक्ति चलाता है, जो अनन्त-स्वरूप लक्ष्मण की छाती में लगती है और वे गिर पड़ते हैं। रावण उन्हें उठाना चाहता है पर उठा नहीं पाता; वह मूर्ख नहीं जानता कि जिनके एक सिर पर सारा ब्रह्माण्ड धूल के कण जैसा टिका है, उन्हें कौन उठाए। तभी हनुमान कठोर वचन कहते हुए दौड़ते हैं और रावण उन्हें घूँसा मारता है।

83.1

रे खल का मारसि कपि भालू । मोहि बिलोकु तोर मैं कालू ॥
खोजत रहेउँ तोहि सुत-घाती । आजु निपाति जुड़ावउँ छाती ॥

re khala kā mārasi kapi bhālū | mohi biloku tora maiṃ kālū ||
khojata raheum̐ tohi suta-ghātī | āju nipāti jur̤āvaum̐ chātī ||

83.2

अस कहि छाड़ेसि बान प्रचंडा । लछिमन किये सकल सत खंडा ॥
कोटिन्ह आयुध रावन डारे । तिल प्रवान करि काटि निवारे ॥

asa kahi chār̤esi bāna pracaṃḍā | lachimana kiye sakala sata khaṃḍā ||
koṭinha āyudha rāvana ḍāre | tila pravāna kari kāṭi nivāre ||

83.3

पुनि निज बानन्ह कीन्ह प्रहारा । स्यन्दन भंजि सारथी मारा ॥
सत सत सर मारे दस भाला । गिरि-सृङ्गन्ह जनु प्रबिसहिँ ब्याला ॥

puni nija bānanha kīnha prahārā | syandana bhaṃji sārathī mārā ||
sata sata sara māre dasa bhālā | giri-sṛṅganha janu prabisahim̐ byālā ||

83.4

पुनि सत सर पुनि मारा उर माहीं । परेउ धरनि तल सुधि कछु नाहीं ॥
उठा प्रबल पुनि मुरछा जागी । छाडिसि ब्रह्म दीन्हि जो साँगीं ॥

puni sata sara puni mārā ura māhīṃ | pareu dharani tala sudhi kachu nāhīṃ ||
uṭhā prabala puni murachā jāgī | chāḍisi brahma dīnhi jo sām̐gīṃ ||

83.छं॰ 1छन्द

से ब्रह्म-दत्त प्रचंड सक्ति अनन्त उर लागी सही ।
पर्यो बीर विकल उठाव दसमुख, अतुल बल महिमा रही ॥
ब्रह्मांड-भुवन बिराज जाकें एक सिर जिमि रज-कनी ।
तेहि वह उठावन मूढ़ रावन, जान नहिँ त्रिभुवन-धनी ॥

se brahma-datta pracaṃḍa sakti ananta ura lāgī sahī |
paryo bīra vikala uṭhāva dasamukha, atula bala mahimā rahī ||
brahmāṃḍa-bhuvana birāja jākeṃ eka sira jimi raja-kanī |
tehi vaha uṭhāvana mūr̤ha rāvana, jāna nahim̐ tribhuvana-dhanī ||

दो॰ 83दोहा

देखि पवनसुत धायउ, बोलत बचन कठोर ।
आवत कपिहि हनेड तेहिं, मुष्टि-प्रहार प्रघोर ॥

dekhi pavanasuta dhāyau, bolata bacana kaṭhora |
āvata kapihi haneḍa tehiṃ, muṣṭi-prahāra praghora ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0