तब रावन मय-सुता उठाई । कहइ लाग खल निज प्रभुताई ॥
सुनु तैं प्रिया बृथा भय माना । जग जोधा को मोहि समाना ॥
taba rāvana maya-sutā uṭhāī | kahai lāga khala nija prabhutāī ||
sunu taiṃ priyā bṛthā bhaya mānā | jaga jodhā ko mohi samānā ||
6 श्लोक · 8 में से 121
रावण मय की पुत्री मंदोदरी को उठाकर अपनी प्रभुता बखानता है: प्रिये, तूने व्यर्थ भय माना है। वरुण, कुबेर, पवन, यम और काल, सब दिक्पालों को मैंने भुजबल से जीता है; देवता, दानव और मनुष्य सब मेरे वश में हैं, फिर तुझे भय क्यों हुआ? फिर वह सभा में जा बैठता है। मंदोदरी मन में जान लेती है कि काल के वश होने से इसमें अभिमान उपजा है। सभा में रावण मंत्रियों से पूछता है कि शत्रु से किस विधि लड़ें। मंत्री कहते हैं: हे राक्षसराज, बार-बार क्या पूछते हैं, डर किस बात का? मनुष्य, वानर और भालू तो हमारा भोजन हैं। सबकी बात सुनकर प्रहस्त हाथ जोड़कर कहता है: प्रभु, नीति के विरुद्ध न चलिए, इन मंत्रियों की बुद्धि बहुत थोड़ी है।
तब रावन मय-सुता उठाई । कहइ लाग खल निज प्रभुताई ॥
सुनु तैं प्रिया बृथा भय माना । जग जोधा को मोहि समाना ॥
taba rāvana maya-sutā uṭhāī | kahai lāga khala nija prabhutāī ||
sunu taiṃ priyā bṛthā bhaya mānā | jaga jodhā ko mohi samānā ||
बरुन कुबेर पवन जम काला । भुज बल जितेउँ सकल दिगपाला ॥
देव दनुज नर सब बस मेरे । कवन हेतु उपजा भय तोरें ॥
baruna kubera pavana jama kālā | bhuja bala jiteum̐ sakala digapālā ||
deva danuja nara saba basa mere | kavana hetu upajā bhaya toreṃ ||
नाना विधि तेहि कहेसि बुझाई । सभाँ बहोरि बैठ सो जाई ॥
मंदोदरीं हृदय अस जाना । काल-बिबस उपजा अभिमाना ॥
nānā vidhi tehi kahesi bujhāī | sabhām̐ bahori baiṭha so jāī ||
maṃdodarīṃ hṛdaya asa jānā | kāla-bibasa upajā abhimānā ||
सभाँ आइ मन्त्रिन्ह तेहि बूझा । करब कवनि बिधि रिपु से जूझा ॥
कहहिँ सचिव सुनु निसिचर-नाहा । बार बार प्रभु पूछहु काहा ॥
sabhām̐ āi mantrinha tehi būjhā | karaba kavani bidhi ripu se jūjhā ||
kahahim̐ saciva sunu nisicara-nāhā | bāra bāra prabhu pūchahu kāhā ||
कहहु कवन भय करिय बिचारा । नर कपि भालु अहार हमारा ॥
kahahu kavana bhaya kariya bicārā | nara kapi bhālu ahāra hamārā ||
सब के बचन सबहि के सवन सुनि, कह प्रहस्त कर जोरि ।
नीति-बिरोध न करिय प्रभु, मत्रिंन्ह मति अति-थोरि ॥
saba ke bacana sabahi ke savana suni, kaha prahasta kara jori |
nīti-birodha na kariya prabhu, matriṃnha mati ati-thori ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0