लंकाकाण्ड

अध्याय 7: मंदोदरी: प्रभु तुम पर दया करने आए हैं

5 श्लोक · 7 में से 121

इस अध्याय में क्या होता है

मंदोदरी: प्रभु तुम पर दया करने आए हैं

मंदोदरी आगे कहती है: रघुनाथ दीनदयाल हैं, सामने सिर झुकाकर आए को तो बाघ भी नहीं खाता। जो करना चाहिए था वह सब आप कर चुके, देवता, असुर और चर-अचर सबको जीत लिया। संत यह नीति कहते हैं कि चौथेपन में राजा को वन जाना चाहिए। हे स्वामी, वहाँ उनका भजन कीजिए जो सृष्टि करते, पालते और संहार करते हैं। वही रघुवीर शरणागत पर प्रेम करने वाले हैं, सारी ममता छोड़कर उन्हें भजिए। जिनके लिए श्रेष्ठ मुनि साधना करते हैं और राजा राज्य छोड़कर वैरागी हो जाते हैं, वही कोसलपति रघुनाथ आप पर दया करने आए हैं। प्रिय, यदि आप मेरी सीख मानें तो तीनों लोकों में आपका पवित्र सुयश होगा। दोहे में वह विनती समाप्त करती है: नाथ, रघुनाथ को भजिए, जिससे मेरा सुहाग अचल रहे।

7.1

नाथ दीन दयाल रघुराई । बाघउ सनमुख गये न खाई ॥
चाहिय करन सो सब करि बीते । तुम्ह सुर असुर चराचर जीते ॥

nātha dīna dayāla raghurāī | bāghau sanamukha gaye na khāī ||
cāhiya karana so saba kari bīte | tumha sura asura carācara jīte ||

7.2

सन्त कहहिँ असि नीति दसानन । चौथे पन जाइहि नृप कानन ॥
तासु भजन कीजिय तहँ भर्ता । जो कर्ता पालन संहर्ता ॥

santa kahahim̐ asi nīti dasānana | cauthe pana jāihi nṛpa kānana ||
tāsu bhajana kījiya taham̐ bhartā | jo kartā pālana saṃhartā ||

7.3

सोइ रघुबीर प्रनत-अनुरागी । भजहु नाथ ममता सब त्यागी ॥
मुनिबर जतन कहिँ जेहि लागी । भूप राज तजि होहिँ बिरागी ॥

soi raghubīra pranata-anurāgī | bhajahu nātha mamatā saba tyāgī ||
munibara jatana kahim̐ jehi lāgī | bhūpa rāja taji hohim̐ birāgī ||

7.4

सोइ कोसलधीस रघुराया । आयउ करन तोहि पर दाया ॥
जौँ पिय मानहु मोर सिखावन । सुजस होइ तिहुँ पुर अति पावन ॥

soi kosaladhīsa raghurāyā | āyau karana tohi para dāyā ||
jaum̐ piya mānahu mora sikhāvana | sujasa hoi tihum̐ pura ati pāvana ||

दो॰ 7दोहा

अस कहि नयन नीर भरि गहि पद कम्पित गात ।
नाथ भजहु रघुनाथहि, अचल होइ अहिवात ॥

asa kahi nayana nīra bhari gahi pada kampita gāta |
nātha bhajahu raghunāthahi, acala hoi ahivāta ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0