लंकाकाण्ड

अध्याय 70: वानरों की पुकार और कुम्भकर्ण की भुजाओं का कटना

7 श्लोक · 70 में से 121

इस अध्याय में क्या होता है

वानरों की पुकार और कुम्भकर्ण की भुजाओं का कटना

भालू और वानर ऐसे भागते हैं जैसे भेड़िये को देखकर भेड़ें। शिवजी भवानी से कहते हैं कि वे पुकारते हुए भागे: यह निशाचर अकाल जैसा है, वानर-कुल रूपी देश को नष्ट कर देगा; हे कृपा के मेघ, शरणागत के दुख हरने वाले राम, रक्षा कीजिए। करुण वचन सुनकर भगवान धनुष-बाण सँभालते हैं। सौ बाण चढ़ाकर छोड़ते हैं, जो उसके शरीर में समा जाते हैं। वह एक पर्वत उखाड़ता है तो प्रभु वह भुजा काट देते हैं। बाएँ हाथ में पर्वत लेकर दौड़ता है, वह भुजा भी कट जाती है। भुजाहीन वह पंख कटे मन्दराचल जैसा दिखता है और मुँह फैलाकर दौड़ता है, मानो तीनों लोक खा जाएगा; आकाश में सिद्ध और देवता डरकर हाहाकार करते हैं।

70.1

भागे भालु-बलीमुख-जूथा । बृक बिलोकि जिमि मेष-बरूथा ॥
चले भागि कपि भालु भवानी । बिकल पुकारत आरत बानी ॥

bhāge bhālu-balīmukha-jūthā | bṛka biloki jimi meṣa-barūthā ||
cale bhāgi kapi bhālu bhavānī | bikala pukārata ārata bānī ||

70.2

यह निसिचर दुकाल सम अहई । कपिकुल-देस परन अब चहई ॥
कृपा बारिधर राम खरारी । पाहि पाहि प्रनतारति-हारी ॥

yaha nisicara dukāla sama ahaī | kapikula-desa parana aba cahaī ||
kṛpā bāridhara rāma kharārī | pāhi pāhi pranatārati-hārī ||

70.3

सकरून बचन सुनत भगवाना । चले सुधारि सरासन बाना ॥
राम सेन निज पाछे घाली । चले सकोप महा बलसाली ॥

sakarūna bacana sunata bhagavānā | cale sudhāri sarāsana bānā ||
rāma sena nija pāche ghālī | cale sakopa mahā balasālī ||

70.4

खैंचि धनुष सर सत सन्धाने । छूटे तीर सरीर समाने ॥
लागत सर धावा रिस भरा । कुधर डगमगत डोलति धरा ॥

khaiṃci dhanuṣa sara sata sandhāne | chūṭe tīra sarīra samāne ||
lāgata sara dhāvā risa bharā | kudhara ḍagamagata ḍolati dharā ||

70.5

लीन्ह एक तेहिं सैल उपाटी । रघुकुल तिलक भुजा सोइ काटी ॥
धावा बाम बाहु गिरि धारी । प्रभु सोउ भुजा काटि महि पारी ॥

līnha eka tehiṃ saila upāṭī | raghukula tilaka bhujā soi kāṭī ||
dhāvā bāma bāhu giri dhārī | prabhu sou bhujā kāṭi mahi pārī ||

70.6

काटें भुजा सोह खल कैसा । पच्छहीन मन्दर गिरि जैसा ॥
उग्र बिलोकनि प्रभुहि बिलोका । असन चहत मानहुँ त्रेलोका ॥

kāṭeṃ bhujā soha khala kaisā | pacchahīna mandara giri jaisā ||
ugra bilokani prabhuhi bilokā | asana cahata mānahum̐ trelokā ||

दो॰ 70दोहा

करि चिक्कार बार अति, धावा बदन पसारि ।
गगन सिद्ध सुर त्रासित, हा हा होति पुकारि ॥

kari cikkāra bāra ati, dhāvā badana pasāri |
gagana siddha sura trāsita, hā hā hoti pukāri ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0