लंकाकाण्ड

अध्याय 58: कालनेमि वध, भरत के बाण से हनुमान गिरे

5 श्लोक · 58 में से 121

इस अध्याय में क्या होता है

कालनेमि वध, भरत के बाण से हनुमान गिरे

वह कहती है: हे कपि, तुम्हारे दर्शन से मैं निष्पाप हो गई, तात, श्रेष्ठ मुनि का शाप मिट गया। वह मुनि नहीं, घोर राक्षस है, मेरी बात सच मानो। अप्सरा के जाते ही हनुमान राक्षस के पास जाते हैं: मुनिवर, पहले गुरुदक्षिणा ले लीजिए, फिर मुझे मन्त्र दीजिए। फिर पूँछ उसके सिर में लपेटकर उसे पछाड़ देते हैं। मरते समय वह अपना असली शरीर प्रकट करता है और राम-राम कहकर प्राण छोड़ता है। हर्षित होकर हनुमान आगे चलते हैं। औषधि न पहचान पाने पर वे पूरा पर्वत उखाड़ लेते हैं। पर्वत लिए रात में आकाश में दौड़ते हुए वे अवधपुरी के ऊपर से जाते हैं। भरत अत्यन्त विशाल आकार देखकर मन में राक्षस अनुमान करते हैं और धनुष कान तक खींचकर बिना फल का बाण मारते हैं।

58.1

कपि तव दरस भइउँ निष्पापा । मिटा तात मुनि बर कर सापा ॥
मुनि न होइ यह निसिचर घोरा । मानहुँ सत्य बचन कपि मोरा ॥

kapi tava darasa bhaium̐ niṣpāpā | miṭā tāta muni bara kara sāpā ||
muni na hoi yaha nisicara ghorā | mānahum̐ satya bacana kapi morā ||

58.2

अस कहि गई अपछरा जबहीं । निसिचर निकट गयउ कपि तबहीं ॥
कह कपि मुनि गुरदछिना लेहू । पाछें हमहिँ मन्त्र तुम्ह देहू ॥

asa kahi gaī apacharā jabahīṃ | nisicara nikaṭa gayau kapi tabahīṃ ||
kaha kapi muni guradachinā lehū | pācheṃ hamahim̐ mantra tumha dehū ||

58.3

सिर लंगूर लपेटि पछारा । निज तनु प्रगटेसि मरती बारा ॥
राम राम कहि छाड़ेसि प्राना । सुनि मन हरषि चलेउ हनुमाना ॥

sira laṃgūra lapeṭi pachārā | nija tanu pragaṭesi maratī bārā ||
rāma rāma kahi chār̤esi prānā | suni mana haraṣi caleu hanumānā ||

58.4

देखा सैल न औषध चीन्हा । सहसा कपि उपारि गिरि लीन्हा ॥
गहि गिरि निसि नभ धावत भयऊ । अवधपुरी ऊपर कपि गयऊ ॥

dekhā saila na auṣadha cīnhā | sahasā kapi upāri giri līnhā ||
gahi giri nisi nabha dhāvata bhayaū | avadhapurī ūpara kapi gayaū ||

दो॰ 58दोहा

देखा भरत बिसाल अति, निसिचर मन अनुमानि ।
बिनु फर सायक मारेउ, चाप श्रवन लगि तानि ॥

dekhā bharata bisāla ati, nisicara mana anumāni |
binu phara sāyaka māreu, cāpa śravana lagi tāni ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0