परेउ मुरुछि महि लागत सायक । सुमिरत राम राम रघुनायक ॥
सुनि प्रिय बचन भरत तब धाए । कपि समीप अति आतुर आये ॥
pareu muruchi mahi lāgata sāyaka | sumirata rāma rāma raghunāyaka ||
suni priya bacana bharata taba dhāe | kapi samīpa ati ātura āye ||
5 श्लोक · 59 में से 121
बाण लगते ही हनुमान राम, राम, रघुनायक का स्मरण करते हुए मूर्छित होकर धरती पर गिर पड़ते हैं। प्रिय नाम सुनकर भरत दौड़कर पास आते हैं। वे उसे हृदय से लगाकर जगाते हैं, पर वह नहीं जागता। आँसू भरे नेत्रों से भरत कहते हैं: जिस विधाता ने मुझे राम से विमुख किया, उसी ने फिर यह दारुण दुख दिया। यदि मन, वचन और शरीर से राम के चरणकमलों में मेरी निष्कपट प्रीति हो, और यदि रघुपति मुझ पर अनुकूल हों, तो यह वानर थकान और पीड़ा से मुक्त हो जाए। यह वचन सुनते ही कपिराज जय कोसलपति कहकर उठ बैठते हैं। भरत उन्हें हृदय से लगा लेते हैं, शरीर पुलकित और नेत्र सजल हैं; राम का स्मरण कर प्रेम हृदय में नहीं समाता।
परेउ मुरुछि महि लागत सायक । सुमिरत राम राम रघुनायक ॥
सुनि प्रिय बचन भरत तब धाए । कपि समीप अति आतुर आये ॥
pareu muruchi mahi lāgata sāyaka | sumirata rāma rāma raghunāyaka ||
suni priya bacana bharata taba dhāe | kapi samīpa ati ātura āye ||
बिकल बिलोकि कीस उर लावा । जागत नहिँ बहु भाँति जगावा ॥
मुख मलीन मन भए दुखारी । कहत बचन भरि लोचन बारी ॥
bikala biloki kīsa ura lāvā | jāgata nahim̐ bahu bhām̐ti jagāvā ||
mukha malīna mana bhae dukhārī | kahata bacana bhari locana bārī ||
जेहिं बिधि राम-विमुख मोहि कीन्हा । तेहिं पुनि यह दारुन दुख दीन्हा ॥
जौँ मोरें सन बच अरु काया । प्रीति राम-पद-कमल अमाया ॥
jehiṃ bidhi rāma-vimukha mohi kīnhā | tehiṃ puni yaha dāruna dukha dīnhā ||
jaum̐ moreṃ sana baca aru kāyā | prīti rāma-pada-kamala amāyā ||
तो कपि होउ बिगत श्रम-सूला । जौँ मो पर रघुपति-अनुकूला ॥
सुनत बचन उठि बैठ कपीसा । कहि जय जयति कोसलाधीसा ॥
to kapi hou bigata śrama-sūlā | jaum̐ mo para raghupati-anukūlā ||
sunata bacana uṭhi baiṭha kapīsā | kahi jaya jayati kosalādhīsā ||
लीन्ह कपिहि उर लाइ, पुलकित तनु लोचन सजल ।
प्रीति न हृदयँ समाइ, सुमिरि राम-रघुकुल--तिलक ॥
līnha kapihi ura lāi, pulakita tanu locana sajala |
prīti na hṛdayam̐ samāi, sumiri rāma-raghukula--tilaka ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0