लंकाकाण्ड

अध्याय 55: हनुमान वैद्य सुषेण को ले आते हैं

5 श्लोक · 55 में से 121

इस अध्याय में क्या होता है

हनुमान वैद्य सुषेण को ले आते हैं

शिव गिरिजा से कहते हैं: जिनकी क्रोधाग्नि चौदहों भुवनों को पल में जला देती है, जिनकी सेवा देवता, मनुष्य और सारा चराचर करता है, उन्हें युद्ध में कौन जीत सकता है? यह लीला वही जानता है जिस पर राम की कृपा हो। संध्या होने पर दोनों सेनाएँ लौटती हैं। व्यापक ब्रह्म, अजेय भुवनेश्वर करुणाकर पूछते हैं: लक्ष्मण कहाँ हैं? तभी हनुमान उन्हें उठा लाते हैं, और भाई को देखकर प्रभु अत्यन्त दुखी होते हैं। जाम्बवान कहते हैं कि सुषेण वैद्य लंका में रहता है, किसी को भेजकर बुलवाइए। हनुमान छोटा रूप धरकर जाते हैं और उसे घर समेत तुरन्त ले आते हैं। सुषेण आकर रघुपति के चरणकमलों में सिर नवाता है, पर्वत और औषधि का नाम बताता है और कहता है: पवनसुत, जाकर ले आओ।

55.1

सुनु गिरिजा क्रोधानल जासू । जारइ भुवन चारि दस आसू ॥
सक संग्राम जीति को ताही । सेवहिँ सुर नर अग जग जाही ॥

sunu girijā krodhānala jāsū | jārai bhuvana cāri dasa āsū ||
saka saṃgrāma jīti ko tāhī | sevahim̐ sura nara aga jaga jāhī ||

55.2

यह कौतूहल जानइ लाई । जा पर कृपा राम के होई ॥
सन्ध्या भई फिरी दोउ बाहनी । लगे सँभारन निज निज अनी ॥

yaha kautūhala jānai lāī | jā para kṛpā rāma ke hoī ||
sandhyā bhaī phirī dou bāhanī | lage sam̐bhārana nija nija anī ||

55.3

व्यापक ब्रह्म अजित भुवनेश्वर । लछिमन कहाँ बूझ करुनाकर ॥
तबलगि लेन आयउ हनुमाना । अनुज देखि प्रभु अति दुख माना ॥

vyāpaka brahma ajita bhuvaneśvara | lachimana kahām̐ būjha karunākara ||
tabalagi lena āyau hanumānā | anuja dekhi prabhu ati dukha mānā ||

55.4

जामवन्त कह बैद सुषेना । लंकाँ रह कोउ पठई लेना ॥
धरि लघु-रूप गयउ हनुमन्ता । आनेउ भवन-समेत तुरन्ता ॥

jāmavanta kaha baida suṣenā | laṃkām̐ raha kou paṭhaī lenā ||
dhari laghu-rūpa gayau hanumantā | āneu bhavana-sameta turantā ||

दो॰ 55दोहा

रघुपति-चरन सरोज सिर, नायउ आइ सुषेन ।
कहा नाम गिरि औषधी, जाहु पवन-सुत लेन ॥

raghupati-carana saroja sira, nāyau āi suṣena |
kahā nāma giri auṣadhī, jāhu pavana-suta lena ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0