घायल बीर बिराजहिँ कैसे । कुसुमित किंसुक के तरु जैसे ॥
लछिमन मेघनाद दोउ जोधा । भिरहिँ परसपर करि अति क्रोधा ॥
ghāyala bīra birājahim̐ kaise | kusumita kiṃsuka ke taru jaise ||
lachimana meghanāda dou jodhā | bhirahim̐ parasapara kari ati krodhā ||
5 श्लोक · 54 में से 121
घायल वीर फूले पलाश जैसे दिखते हैं। लक्ष्मण और मेघनाद दोनों योद्धा अत्यन्त क्रोध से परस्पर भिड़ते हैं, कोई किसी को जीत नहीं पाता, और राक्षस छल-बल से अनीति करता है। तब अनन्त शेषावतार लक्ष्मण, क्रोधित होते हैं और तुरन्त रथ तोड़कर सारथी को मार डालते हैं। शेष अनेक प्रकार से प्रहार करते हैं, राक्षस के प्राण भर शेष रह जाते हैं। रावणपुत्र मन में अनुमान करता है कि अब संकट है, ये मेरे प्राण हर लेंगे। वह वीरघातिनी शक्ति छोड़ता है, जो तेजपुंज लक्ष्मण की छाती में लगती है। शक्ति लगते ही उन्हें मूर्छा आ जाती है। तब मेघनाद भय छोड़कर उनके पास जाता है। मेघनाद जैसे सौ करोड़ योद्धा उन्हें उठाने लगते हैं, पर जगत के आधार शेष कैसे उठें? वे खिसियाकर चले जाते हैं।
घायल बीर बिराजहिँ कैसे । कुसुमित किंसुक के तरु जैसे ॥
लछिमन मेघनाद दोउ जोधा । भिरहिँ परसपर करि अति क्रोधा ॥
ghāyala bīra birājahim̐ kaise | kusumita kiṃsuka ke taru jaise ||
lachimana meghanāda dou jodhā | bhirahim̐ parasapara kari ati krodhā ||
एकहि एक सकइ नहिं जीती । निसिचर छल बल करइ अनीती ॥
क्रोधवन्त तब भयउ अनन्ता । भञ्जेउ रथ सारथी तुरन्ता ॥
ekahi eka sakai nahiṃ jītī | nisicara chala bala karai anītī ||
krodhavanta taba bhayau anantā | bhañjeu ratha sārathī turantā ||
नाना विधि प्रहार कर सेषा । राच्छस भयउ प्रान अवसेषा ॥
रावन-सुत निज-सन अनुमाना । संकठ भयउ हरिहि मम प्राना ॥
nānā vidhi prahāra kara seṣā | rācchasa bhayau prāna avaseṣā ||
rāvana-suta nija-sana anumānā | saṃkaṭha bhayau harihi mama prānā ||
बीरघातिनी छाडिसि साँगी । तेज-पुञ्ज लछिमन उर लागी ॥
मुरछा भई सक्ति के लागें । तब बलि गयउ निकट भय त्यागें ॥
bīraghātinī chāḍisi sām̐gī | teja-puñja lachimana ura lāgī ||
murachā bhaī sakti ke lāgeṃ | taba bali gayau nikaṭa bhaya tyāgeṃ ||
मेघनाद सम कोटि सत, जोधा रहे उठाइ ।
जगदाधार सेष किमि, उठै चले खिसिआइ ॥
meghanāda sama koṭi sata, jodhā rahe uṭhāi |
jagadādhāra seṣa kimi, uṭhai cale khisiāi ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0