निसा जानि कपि चारिउ अनी । आये जहाँ कोसला-धनी ॥
राम-कृपा-करि चितवा जबहीं । भये बिगतश्रम बानर तबही ॥
nisā jāni kapi cāriu anī | āye jahām̐ kosalā-dhanī ||
rāma-kṛpā-kari citavā jabahīṃ | bhaye bigataśrama bānara tabahī ||
6 श्लोक · 48 में से 121
रात होते ही वानरों के चारों दल कोसलपति के पास लौट आते हैं, और राम की कृपादृष्टि से उनकी थकान मिट जाती है। उधर रावण मंत्रियों को बुलाकर कहता है कि वानरों ने आधी सेना नष्ट कर दी, शीघ्र विचारो क्या करें। बूढ़ा मंत्री माल्यवान नीति की पवित्र बात कहता है। जब से तुम सीता को हर लाए हो, इतने अपशकुन हो रहे हैं कि कहे नहीं जाते। वेद-पुराण जिनका यश गाते हैं, उन राम से विमुख होकर किसी ने सुख नहीं पाया। जिन्होंने भाई सहित हिरण्याक्ष को और बलवान मधु-कैटभ को मारा, वही कृपासिन्धु भगवान अवतरे हैं। वे कालरूप हैं, दुष्टों के वन को जलाने वाली अग्नि, गुणों के धाम और ज्ञानघन; शिव और ब्रह्मा जिनकी सेवा करते हैं, उनसे कैसा विरोध?
निसा जानि कपि चारिउ अनी । आये जहाँ कोसला-धनी ॥
राम-कृपा-करि चितवा जबहीं । भये बिगतश्रम बानर तबही ॥
nisā jāni kapi cāriu anī | āye jahām̐ kosalā-dhanī ||
rāma-kṛpā-kari citavā jabahīṃ | bhaye bigataśrama bānara tabahī ||
उहाँ दसानन सचिव हँकारे । सब सन कहेसि सुभट जे मारे ॥
आधा कटक कपिन्ह सङ्घारा । कहहु बेगि का करिय बिचारा ॥
uhām̐ dasānana saciva ham̐kāre | saba sana kahesi subhaṭa je māre ||
ādhā kaṭaka kapinha saṅghārā | kahahu begi kā kariya bicārā ||
माल्यवन्त अति जरठ निसाचर । रावन-मातु-पिता मन्त्री बर ॥
बोला बचन नीति अति-पावन । सुनहु तात कछु मोर सिखावन ॥
mālyavanta ati jaraṭha nisācara | rāvana-mātu-pitā mantrī bara ||
bolā bacana nīti ati-pāvana | sunahu tāta kachu mora sikhāvana ||
जब ते तुम्ह सीता हरि आनी । असगुन होहिं न जाहिँ बखानी ॥
बेद-पुरान जासु जस गावा । राम बिमुख काहुँ न सुख काहुन पावा ॥
jaba te tumha sītā hari ānī | asaguna hohiṃ na jāhim̐ bakhānī ||
beda-purāna jāsu jasa gāvā | rāma bimukha kāhum̐ na sukha kāhuna pāvā ||
दो हिरन्याच्छ भ्राता सहित, मधु कैटभ बलवान ।
जेहि मारे सोइ अवतरेउ, कृपासिन्धु भगवान ॥
do hiranyāccha bhrātā sahita, madhu kaiṭabha balavāna |
jehi māre soi avatareu, kṛpāsindhu bhagavāna ||
काल रूप खल-बन-दहन, गुनागार घनबोध ।
सिव-बिरञ्चि जेहि सेवहिँ, तासोँ कवन विरोध ॥
kāla rūpa khala-bana-dahana, gunāgāra ghanabodha |
siva-birañci jehi sevahim̐, tāsom̐ kavana virodha ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0