नारि बचन सुनि बिसिख समाना । सभाँ गयउ उठि होत बिहाना ॥
बैठ जाइ सिंहासन फूली । अति-अभिमान त्रास सब भूली ॥
nāri bacana suni bisikha samānā | sabhām̐ gayau uṭhi hota bihānā ||
baiṭha jāi siṃhāsana phūlī | ati-abhimāna trāsa saba bhūlī ||
7 श्लोक · 38 में से 121
पत्नी के वचन बाण जैसे लगे, फिर भी सबेरे रावण फूलकर सिंहासन पर बैठा, अभिमान में डर भूल गया। इधर राम अंगद को पास बैठाकर हँसकर पूछते हैं: बालिपुत्र, अतुल बलवान रावण के चार मुकुट तुमने कैसे पाए? अंगद कहते हैं: वे मुकुट नहीं, राजा के चार गुण हैं: साम, दान, दण्ड और भेद, जो वेद के अनुसार राजा के हृदय में बसते हैं; ये नीति और धर्म के चार चरण हैं। रावण को धर्महीन, आपके चरणों से विमुख और काल के वश जानकर ये उसे छोड़कर आपके पास आ गए, हे कोसलपति। यह चतुराई सुनकर राम हँसते हैं, फिर अंगद गढ़ का सब समाचार कहते हैं।
नारि बचन सुनि बिसिख समाना । सभाँ गयउ उठि होत बिहाना ॥
बैठ जाइ सिंहासन फूली । अति-अभिमान त्रास सब भूली ॥
nāri bacana suni bisikha samānā | sabhām̐ gayau uṭhi hota bihānā ||
baiṭha jāi siṃhāsana phūlī | ati-abhimāna trāsa saba bhūlī ||
इहाँ राम अङ्गदहि बोलावा । आइ चरन-पङ्कज सिर नावा ॥
अति-आदर समीप बैठारी । बोले बिहँसि कृपाल खरारी ॥
ihām̐ rāma aṅgadahi bolāvā | āi carana-paṅkaja sira nāvā ||
ati-ādara samīpa baiṭhārī | bole biham̐si kṛpāla kharārī ||
बालितनय कौतुक अति मोही । तात सत्य कहु पूछउँ तोही ॥
रावन-जातुधान-कुल-टीका । भुज-बल-अतुल जासु जग लीका ॥
bālitanaya kautuka ati mohī | tāta satya kahu pūchaum̐ tohī ||
rāvana-jātudhāna-kula-ṭīkā | bhuja-bala-atula jāsu jaga līkā ||
तासु मुकुट तुम्ह चारि चलाये । कहहु तात कवनी विधि पाये ॥
सुनु सर्वज्ञ प्रनत-सुखकारी । मुकुट न होहिं भूप-गुन-चारी ॥
tāsu mukuṭa tumha cāri calāye | kahahu tāta kavanī vidhi pāye ||
sunu sarvajña pranata-sukhakārī | mukuṭa na hohiṃ bhūpa-guna-cārī ||
साम दान अरु दंड बिभेदा । नृप उर बसहिँ नाथ कह बेदा ॥
नीति धरम के चरन सुहाये । अस जियँ जानि नाथ पहिँ आये ॥
sāma dāna aru daṃḍa bibhedā | nṛpa ura basahim̐ nātha kaha bedā ||
nīti dharama ke carana suhāye | asa jiyam̐ jāni nātha pahim̐ āye ||
धरम-हीन प्रभु-पद-विमुख, काल-बिबस-दससीस ।
तेहि परिहरि गुन आयउ, सुनहु कोसलाधीस ॥
dharama-hīna prabhu-pada-vimukha, kāla-bibasa-dasasīsa |
tehi parihari guna āyau, sunahu kosalādhīsa ||
परम-चतुरता श्रवन सुनि, बिहँसे राम उदार ।
समाचार पुनि सब कहे, गढ़ के बालिकुमार ॥
parama-caturatā śravana suni, biham̐se rāma udāra |
samācāra puni saba kahe, gar̤ha ke bālikumāra ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0