जो रामेस्वर दरसन करिहहिं । ते तनु तजि मम लोक सिधरिहहिं ॥
जो गंगा-जल आनि चढ़ाइहीं । से साजुज्य मुक्ति नर पाइहि ॥
jo rāmesvara darasana karihahiṃ | te tanu taji mama loka sidharihahiṃ ||
jo gaṃgā-jala āni car̤hāihīṃ | se sājujya mukti nara pāihi ||
6 श्लोक · 3 में से 121
श्रीराम इस स्थान का फल बताते हैं। जो रामेश्वर के दर्शन करेगा, वह देह छोड़कर मेरे लोक को जाएगा। जो गंगाजल लाकर यहाँ चढ़ाएगा, वह सायुज्य मुक्ति पाएगा। जो निष्काम होकर छल छोड़कर सेवा करेगा, उसे शंकर मेरी भक्ति देंगे, और जो मेरे बनाए सेतु का दर्शन करेगा, वह बिना श्रम भवसागर तर जाएगा। मुनि प्रसन्न होकर अपने आश्रमों को लौटते हैं और शिव गिरिजा से कहते हैं कि रघुपति की यही रीति है, वे शरणागत पर सदा प्रेम करते हैं। नल-नील सेतु पूरा करते हैं। जो पत्थर स्वयं डूबते और दूसरों को डुबोते हैं, वे नाव जैसे तैरने लगते हैं। तुलसीदास कहते हैं कि यह न समुद्र की महिमा है, न पत्थरों का गुण, न वानरों की करनी; यह रघुवीर का प्रताप है।
जो रामेस्वर दरसन करिहहिं । ते तनु तजि मम लोक सिधरिहहिं ॥
जो गंगा-जल आनि चढ़ाइहीं । से साजुज्य मुक्ति नर पाइहि ॥
jo rāmesvara darasana karihahiṃ | te tanu taji mama loka sidharihahiṃ ||
jo gaṃgā-jala āni car̤hāihīṃ | se sājujya mukti nara pāihi ||
होइ अकाम जो छल तजि सेइहि । भगति मोरि तेहि संकर देइहि ॥
मम कृत सेतु जो दरसन करिही । सो बिनु सम भव-सागर तरिही ॥
hoi akāma jo chala taji seihi | bhagati mori tehi saṃkara deihi ||
mama kṛta setu jo darasana karihī | so binu sama bhava-sāgara tarihī ||
राम बचन सब के जिय भाये । मुनिबर निज निज आश्रम आये ॥
गिरिजा रघुपति कै यह रीती । सन्तत करहिं प्रनत पर प्रीती ॥
rāma bacana saba ke jiya bhāye | munibara nija nija āśrama āye ||
girijā raghupati kai yaha rītī | santata karahiṃ pranata para prītī ||
बाँधा सेतु नील-नल-नागर । राम कृपाँ-जस भयउ उजागर ॥
बूड़हिँ आनहिँ बोरहिँ जेई । भये उपल बोहित सम तेई ॥
bām̐dhā setu nīla-nala-nāgara | rāma kṛpām̐-jasa bhayau ujāgara ||
būr̤ahim̐ ānahim̐ borahim̐ jeī | bhaye upala bohita sama teī ||
महिमा यह न जलधि के बरनी । पाहन गुन न कपिन्ह कै करनी ॥
mahimā yaha na jaladhi ke baranī | pāhana guna na kapinha kai karanī ||
श्रीरघुबीर प्रताप ते, सिन्धु तरे पाषान ।
ते मतिमंद जे राम तजि, भजहिँ जाइ प्रभु आन ॥
śrīraghubīra pratāpa te, sindhu tare pāṣāna |
te matimaṃda je rāma taji, bhajahim̐ jāi prabhu āna ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0