सुनु रावन परिहरि चतुराई । भजसि न कृपासिन्धु रघुराई ॥
जौं खल भएसि राम कर द्रोही । ब्रह्म रुद्र सक राखि न तोही ॥
sunu rāvana parihari caturāī | bhajasi na kṛpāsindhu raghurāī ||
jauṃ khala bhaesi rāma kara drohī | brahma rudra saka rākhi na tohī ||
5 श्लोक · 27 में से 121
अंगद कहते हैं: रावण, चतुराई छोड़ो, कृपासिन्धु रघुनाथ को भजो। राम के शत्रु बने तो ब्रह्मा और रुद्र भी नहीं बचा सकते। हे मूढ़, व्यर्थ गाल मत बजाओ। रण में राम के बाण लगते ही तुम्हारे सिर वानरों के आगे धरती पर गिरेंगे, और भालू-वानर उन्हें गेंद बनाकर चौगान खेलेंगे। जब रघुनायक के भयानक बाण छूटेंगे, तब क्या यह गाल बजाना चलेगा? ऐसा विचारकर उदार राम को भजो। यह सुनकर रावण ऐसे जल उठता है मानो जलती आग में घी पड़ गया हो। वह कहता है: कुम्भकर्ण मेरा भाई है, इन्द्र को जीतने वाला पुत्र प्रसिद्ध है; क्या तूने मेरा पराक्रम नहीं सुना? मैंने चर-अचर सबको जीत लिया।
सुनु रावन परिहरि चतुराई । भजसि न कृपासिन्धु रघुराई ॥
जौं खल भएसि राम कर द्रोही । ब्रह्म रुद्र सक राखि न तोही ॥
sunu rāvana parihari caturāī | bhajasi na kṛpāsindhu raghurāī ||
jauṃ khala bhaesi rāma kara drohī | brahma rudra saka rākhi na tohī ||
मूढ़ वृथा जनि मारसि गाला । राम-बयर अस होइहि हाला ॥
तव सिर-निकर कपिन्ह के आगें । परिहहिँ धरनि राम-सर-लागें ॥
mūr̤ha vṛthā jani mārasi gālā | rāma-bayara asa hoihi hālā ||
tava sira-nikara kapinha ke āgeṃ | parihahim̐ dharani rāma-sara-lāgeṃ ||
ते तब सिर कन्दुक इक नाना । खेलहहिं भालु कीस चौगाना ॥
जबहिँ समर कोपहि रघुनायक । छुटिहहिँ अति कराल बहु सायक ॥
te taba sira kanduka ika nānā | khelahahiṃ bhālu kīsa caugānā ||
jabahim̐ samara kopahi raghunāyaka | chuṭihahim̐ ati karāla bahu sāyaka ||
तब कि चलिहि अस गाल तुम्हारा । अस बिचारि भजु राम उदारा ॥
सुनत बचन रावन परजरा । जरत महानल जनु धुन परा ॥
taba ki calihi asa gāla tumhārā | asa bicāri bhaju rāma udārā ||
sunata bacana rāvana parajarā | jarata mahānala janu dhuna parā ||
कुम्भकरन अस बन्धु मम, सुत प्रसिद्ध सक्रारि ।
भार पराक्रम नहिँ सुनेहि, जितेउँ चराचर झारि ॥
kumbhakarana asa bandhu mama, suta prasiddha sakrāri |
bhāra parākrama nahim̐ sunehi, jiteum̐ carācara jhāri ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0