सुनि अङ्गद सकोप कह बानी । बोलु सँभारि अधम अभिमानी ॥
सहसबाहु-भुज-गहन अपारा । दहन अनल-सम जासु कुठारा ॥
suni aṅgada sakopa kaha bānī | bolu sam̐bhāri adhama abhimānī ||
sahasabāhu-bhuja-gahana apārā | dahana anala-sama jāsu kuṭhārā ||
5 श्लोक · 26 में से 121
अंगद क्रोध से कहते हैं: अरे नीच अभिमानी, सँभलकर बोल। जिनका फरसा सहस्रबाहु की भुजाओं के अपार वन को जलाने के लिए अग्नि था, जिसकी धारा में अनगिनत राजा डूब गए, वे परशुराम जिन्हें देखते ही गर्व छोड़कर चले गए, वे राम मनुष्य कैसे, रे अभागे दशशीश? क्या राम मनुष्य हैं, कामदेव केवल धनुर्धारी, गंगा केवल नदी? कामधेनु पशु है, कल्पवृक्ष पेड़, अन्नदान केवल दान, अमृत केवल रस? गरुड़ पक्षी हैं, शेषनाग सर्प, चिन्तामणि पत्थर? हे मंदबुद्धि, क्या वैकुण्ठ एक लोक मात्र है और रघुपति की अखण्ड भक्ति साधारण लाभ? फिर व्यंग्य करते हैं: जब हनुमान सेना सहित तुम्हें मथकर, वन उजाड़कर, नगर जलाकर, तुम्हारा पुत्र मारकर चले गए, तब क्या वे केवल बन्दर थे?
सुनि अङ्गद सकोप कह बानी । बोलु सँभारि अधम अभिमानी ॥
सहसबाहु-भुज-गहन अपारा । दहन अनल-सम जासु कुठारा ॥
suni aṅgada sakopa kaha bānī | bolu sam̐bhāri adhama abhimānī ||
sahasabāhu-bhuja-gahana apārā | dahana anala-sama jāsu kuṭhārā ||
जासु परसु सागर-खर-धारा । बूड़े नृप अगनित बहु धारा ॥
तासु गर्ब जेहि देखत भागा । सो नर क्यों दससीस अभागा ॥
jāsu parasu sāgara-khara-dhārā | būr̤e nṛpa aganita bahu dhārā ||
tāsu garba jehi dekhata bhāgā | so nara kyoṃ dasasīsa abhāgā ||
राम मनुज कस रे सठ बङ्गा । धन्वी-काम नदी पुनि गङ्गा ॥
पसु-सुरधेनु कल्पतरु-रूखा । अन्नदान अरु अन्नदान अरु रस-पीयूखा ॥
rāma manuja kasa re saṭha baṅgā | dhanvī-kāma nadī puni gaṅgā ||
pasu-suradhenu kalpataru-rūkhā | annadāna aru annadāna aru rasa-pīyūkhā ||
बैनतेय-खग अहि-सहसानन । चिन्तामनि पुनि उपल दसानन ॥
सुनु मतिमन्द लोक-बैकुंठा । लाभ कि रघुपति-भगति-अकुंठा ॥
bainateya-khaga ahi-sahasānana | cintāmani puni upala dasānana ||
sunu matimanda loka-baikuṃṭhā | lābha ki raghupati-bhagati-akuṃṭhā ||
सेन सहित तब मान मथि, बन-उजारि पुर जारि ।
कस रे सठ हनुमान कपि, गयउ जो तब सुत मारि ॥
sena sahita taba māna mathi, bana-ujāri pura jāri |
kasa re saṭha hanumāna kapi, gayau jo taba suta māri ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0