लंकाकाण्ड

अध्याय 21: अंगद अपने को बालि का पुत्र बताते हैं

6 श्लोक · 21 में से 121

इस अध्याय में क्या होता है

अंगद अपने को बालि का पुत्र बताते हैं

रावण कहता है: रे कपि, सँभलकर बोल, क्या नहीं जानता कि मैं देवताओं का शत्रु हूँ? अपना और पिता का नाम बता, किस नाते मित्रता मानूँ? अंगद कहते हैं: मेरा नाम अंगद है, बालि का बेटा हूँ; उनसे कभी तुम्हारी भेंट हुई थी। रावण सकुचा जाता है: हाँ, बालि नाम का एक बन्दर था। तो तू उसका लड़का है, कुल को जलाने वाली आग बनकर जन्मा, जो तपस्वी का दूत कहलाता है। बालि कुशल से है? अंगद हँसकर कहते हैं: दस दिन बाद उनके पास जाकर मित्र को गले लगाकर पूछ लेना; राम से विरोध करने वाले की कैसी कुशल होती है, वे सुना देंगे। दोहा कहता है: ऐसी बात अंधा-बहरा भी न कहे, तुम्हारे तो बीस आँखें और बीस कान हैं।

21.1

रे कपिपोत बोलु सँभारी । गूढ़ न जानेहि मोहि सुरारी ॥
कहु निज नाम जनक कर भाई । केहि नातें मानिऐ मिताई ॥

re kapipota bolu sam̐bhārī | gūr̤ha na jānehi mohi surārī ||
kahu nija nāma janaka kara bhāī | kehi nāteṃ māniai mitāī ||

21.2

अङ्गद नाम बालि कर बेटा । तासोँ कबहुँ भई ही भेटा ॥
अङ्गद बचन सुनत सकुचाना । रही बालि बानर मैं जाना ॥

aṅgada nāma bāli kara beṭā | tāsom̐ kabahum̐ bhaī hī bheṭā ||
aṅgada bacana sunata sakucānā | rahī bāli bānara maiṃ jānā ||

21.3

अङ्गद तहीँ बालि कर बालक । उपजेहु बंस अनल कुल-घालक ॥
गर्भ न गयउ व्यर्थ तुम्ह जायहु । निज-मुख तापस दूत कहायहु ॥

aṅgada tahīm̐ bāli kara bālaka | upajehu baṃsa anala kula-ghālaka ||
garbha na gayau vyartha tumha jāyahu | nija-mukha tāpasa dūta kahāyahu ||

21.4

अब कहु कुसल बालि कहँ अहई । बिहँसि बचन तब अङ्गद कहई ॥
दिन दस गये बालि पहिँ जाई । बूझेहु कुसल सखा उर लाई ॥

aba kahu kusala bāli kaham̐ ahaī | biham̐si bacana taba aṅgada kahaī ||
dina dasa gaye bāli pahim̐ jāī | būjhehu kusala sakhā ura lāī ||

21.5

राम-बिरोध कुसल जसि होई । सो सब तोहि सुनाइहि सोई ॥
सुनु सठ भेद होइ मन ताकें । श्रीरघुबीर हृदय नहिं जाकें ॥

rāma-birodha kusala jasi hoī | so saba tohi sunāihi soī ||
sunu saṭha bheda hoi mana tākeṃ | śrīraghubīra hṛdaya nahiṃ jākeṃ ||

दो॰ 21दोहा

हम कुल-पालक सत्य तुम्ह, कुल-पालक दससीस ।
अन्धउ बधिर न अस कहहिँ, नयन कान तब बीस ॥

hama kula-pālaka satya tumha, kula-pālaka dasasīsa |
andhau badhira na asa kahahim̐, nayana kāna taba bīsa ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0