लंकाकाण्ड

अध्याय 19: रावण की सभा में अंगद

5 श्लोक · 19 में से 121

इस अध्याय में क्या होता है

रावण की सभा में अंगद

एक राक्षस तुरन्त जाकर रावण को समाचार देता है। सुनकर दशशीश हँसकर कहता है: बुलाकर लाओ, देखें कहाँ का बन्दर है। आज्ञा पाकर बहुत से दूत दौड़ते हैं और उस वानरश्रेष्ठ को बुला लाते हैं। अंगद देखते हैं कि रावण ऐसा बैठा है मानो प्राणयुक्त काजल का पर्वत हो: भुजाएँ वृक्षों जैसी, सिर शिखरों जैसे, रोमावली मानो लताएँ, और मुख, नाक, आँखें और कान पर्वत की कन्दराओं और खोहों जैसे। अत्यन्त बलवान बालिपुत्र तनिक भी झिझके बिना सभा में जाते हैं। उन्हें देखकर सभासद उठ खड़े होते हैं और रावण के हृदय में भारी क्रोध होता है। जैसे मतवाले हाथियों के झुण्ड में सिंह चला जाए, वैसे ही अंगद मन में राम के प्रताप का स्मरण कर, प्रभु को मन से सिर नवाकर सभा में बैठ जाते हैं।

19.1

तुरत निसाचर एक पठावा । समाचार रावनहि जनावा ॥
सुनत बिहँसि बोला दससीसा । आनहु बोलि कहाँ कर कीसा ॥

turata nisācara eka paṭhāvā | samācāra rāvanahi janāvā ||
sunata biham̐si bolā dasasīsā | ānahu boli kahām̐ kara kīsā ||

19.2

आयसु पाइ दूत बहु धाये । कपि-कुञ्जरहि बोलि लेइ आये ॥
अङ्गद दीख दसानन बैंसें । सहित प्रान कज्जल गिरि जैसा ॥

āyasu pāi dūta bahu dhāye | kapi-kuñjarahi boli lei āye ||
aṅgada dīkha dasānana baiṃseṃ | sahita prāna kajjala giri jaisā ||

19.3

भुजा बिटप सिर सृङ्ग समाना । रोमावली लता जनु नाना ॥
मुख नासिका नयन अरु काना । गिरि कंदरा खोह अनुमाना ॥

bhujā biṭapa sira sṛṅga samānā | romāvalī latā janu nānā ||
mukha nāsikā nayana aru kānā | giri kaṃdarā khoha anumānā ||

19.4

गयउ सभाँ मन नेकु न मुरा । बालि-तनय अति-अल-बाँकुरा ॥
उठे सभासद कपि कह देखी । रावन उर भा क्रोध बिसेखी ॥

gayau sabhām̐ mana neku na murā | bāli-tanaya ati-ala-bām̐kurā ||
uṭhe sabhāsada kapi kaha dekhī | rāvana ura bhā krodha bisekhī ||

दो॰ 19दोहा

जथा मत्त-गज-जूथ मह, पञ्चानन चलि जाइ ।
राम प्रताप सुमिरि मन, बैठ सभाँ सिर नाइ ॥

jathā matta-gaja-jūtha maha, pañcānana cali jāi |
rāma pratāpa sumiri mana, baiṭha sabhām̐ sira nāi ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0