लंकाकाण्ड

अध्याय 15: मंदोदरी द्वारा राम के विराट रूप का वर्णन

6 श्लोक · 15 में से 121

इस अध्याय में क्या होता है

मंदोदरी द्वारा राम के विराट रूप का वर्णन

मंदोदरी विराट रूप बताती है। पाताल जिनके चरण हैं, ब्रह्मलोक सिर, और दूसरे लोक अंग-अंग पर टिके हैं। भौंहों का चलना भयंकर काल है, नेत्र सूर्य हैं, केश बादल। अश्विनीकुमार उनकी नासिका हैं, रात और दिन उनका पलक झपकना, दसों दिशाएँ कान, ऐसा वेद कहते हैं। पवन श्वास है और वेद उनकी अपनी वाणी। लोभ अधर है, यम भयानक दाँत, माया हँसी, दिक्पाल भुजाएँ, अग्नि मुख, वरुण जीभ; उत्पत्ति, पालन और प्रलय उनकी चेष्टा है। अठारह प्रकार की वनस्पतियाँ रोमावली हैं, पर्वत हड्डियाँ, नदियाँ नसें, समुद्र पेट, नरक नीचे की इन्द्रियाँ। शिव अहंकार हैं, ब्रह्मा बुद्धि, चन्द्रमा मन। ऐसा विचारकर, हे मानी स्वामी, वैर छोड़कर रघुवीर के चरणों में प्रीति कीजिए, जिससे मेरा सुहाग न जाए।

15.1

पद-पाताल सीस-अज-धामा । अपर लोक अंग अंग बिश्रामा ॥
भृकुटि-बिलास भयङ्कर-काला । नयन-दिवाकर कच-घन-माला ॥

pada-pātāla sīsa-aja-dhāmā | apara loka aṃga aṃga biśrāmā ||
bhṛkuṭi-bilāsa bhayaṅkara-kālā | nayana-divākara kaca-ghana-mālā ||

15.2

जासु घ्रान अस्विनीकुमारा । निसि अरु दिवस निमेष अपारा ॥
सवन दिसा दस बेद बखानी । मारुत स्वास निगम निज बानी ॥

jāsu ghrāna asvinīkumārā | nisi aru divasa nimeṣa apārā ||
savana disā dasa beda bakhānī | māruta svāsa nigama nija bānī ||

15.3

अधर-लोभ जम-दसन-कराला । माया हास बाहु-दिगपाला ॥
आनन-अनल अम्बुपति-जीहा । उतपति पालन प्रलय समीहा ॥

adhara-lobha jama-dasana-karālā | māyā hāsa bāhu-digapālā ||
ānana-anala ambupati-jīhā | utapati pālana pralaya samīhā ||

15.4

रोम-राजि अष्टादस-बारा । अलिप-सैल सरिता नस-जारा ॥
उदर-उदधि अध-गो जातना । जग-मय प्रभु का बहु कलपना ॥

roma-rāji aṣṭādasa-bārā | alipa-saila saritā nasa-jārā ||
udara-udadhi adha-go jātanā | jaga-maya prabhu kā bahu kalapanā ||

दो॰ 15 (क)दोहा

अहङ्कार-सिव बुद्धि-अज, मन-ससि चित्त-महान ।
अनुज बास सचराचर-रूप राम भगवान ॥

ahaṅkāra-siva buddhi-aja, mana-sasi citta-mahāna |
anuja bāsa sacarācara-rūpa rāma bhagavāna ||

दो॰ 15 (ख)दोहा

अस बिचारि सुनु प्रानपति प्रभु सन बयर बिहाइ ।
प्रीति करहु रघुबीर-पद, सम अहिवात न जाइ ॥

asa bicāri sunu prānapati prabhu sana bayara bihāi |
prīti karahu raghubīra-pada, sama ahivāta na jāi ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0