पूरब दिसि गिरि-गुहा निवासी । परम प्रताप तेज बल रासी ॥
मत्त-नाग-तम-कुरुम बिदारी । ससि केसरी गगन-बन-चारी ॥
pūraba disi giri-guhā nivāsī | parama pratāpa teja bala rāsī ||
matta-nāga-tama-kuruma bidārī | sasi kesarī gagana-bana-cārī ||
7 श्लोक · 12 में से 121
श्रीराम चन्द्रमा को पूर्व दिशा की पर्वत-गुफा में रहने वाले उस सिंह के समान बताते हैं जो अंधकार रूपी हाथी को फाड़ डालता है। फिर पूछते हैं: चन्द्रमा में यह कालापन क्या है। सुग्रीव कहते हैं कि इसमें पृथ्वी की छाया दिखती है। कोई कहता है राहु ने मारा था, उसका दाग छाती पर पड़ा है। कोई कहता है ब्रह्मा ने रति का मुख बनाते समय चन्द्रमा का सार भाग ले लिया, उस छेद से आकाश की छाया दिखती है। प्रभु कहते हैं कि विष चन्द्रमा का भाई है, उसे उसने प्रेम से हृदय में बसाया है, इसी से उसकी किरणें विरहियों को जलाती हैं। हनुमान कहते हैं: प्रभु, चन्द्रमा आपका प्रिय दास है, आपकी श्याम मूर्ति उसके हृदय में बसती है।
पूरब दिसि गिरि-गुहा निवासी । परम प्रताप तेज बल रासी ॥
मत्त-नाग-तम-कुरुम बिदारी । ससि केसरी गगन-बन-चारी ॥
pūraba disi giri-guhā nivāsī | parama pratāpa teja bala rāsī ||
matta-nāga-tama-kuruma bidārī | sasi kesarī gagana-bana-cārī ||
बिथुरे नभ मुकुताहल तारा । निसि-सुन्दरी केर सिँगारा ॥
कह प्रभु ससि मह मेचकताई । कहहु काह निज निज मति भाई ॥
bithure nabha mukutāhala tārā | nisi-sundarī kera sim̐gārā ||
kaha prabhu sasi maha mecakatāī | kahahu kāha nija nija mati bhāī ||
कह सुग़ीव सुनहु रघुराई । ससि महँ प्रगट भूमि के झाँई ॥
मारेउ राहु ससिहि कह कोई । उर महँ परी स्यामता सोई ॥
kaha suġīva sunahu raghurāī | sasi maham̐ pragaṭa bhūmi ke jhām̐ī ||
māreu rāhu sasihi kaha koī | ura maham̐ parī syāmatā soī ||
कोउ कह जब विधि रति-मुख कीन्हा । सार भाग सखि कर हरि लीन्हा ॥
छिद्र से प्रगट इन्दु उर माहीँ । तेहि मग देखिय नभ परिछाहीं ॥
kou kaha jaba vidhi rati-mukha kīnhā | sāra bhāga sakhi kara hari līnhā ||
chidra se pragaṭa indu ura māhīm̐ | tehi maga dekhiya nabha parichāhīṃ ||
प्रभु कह गरल बन्धु ससि केरा । अति प्रिय निज उर दीन्ह बसेरा ॥
विष संजुत कर निकर पसारी । जारत बिरहवन्त नर नारी ॥
prabhu kaha garala bandhu sasi kerā | ati priya nija ura dīnha baserā ||
viṣa saṃjuta kara nikara pasārī | jārata birahavanta nara nārī ||
कह मारुत-सुत सुनहु प्रभु, ससि तुम्हार प्रिय दास ।
तव मूरति बिधु उर बसति, सोइ स्यामता अभास ॥
kaha māruta-suta sunahu prabhu, sasi tumhāra priya dāsa |
tava mūrati bidhu ura basati, soi syāmatā abhāsa ||
पवन-तनय के बचन सुनि, बिहंसे राम सुजान ।
दच्छिन दिसि अवलोकि प्रभु, बोले कृपा निधान ॥
pavana-tanaya ke bacana suni, bihaṃse rāma sujāna |
dacchina disi avaloki prabhu, bole kṛpā nidhāna ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0