इहाँ सुबेल-सैल रघुबीरा । उतरे सेन-सहित अति-भीरा ॥
सैल-सङ्ग एक सुन्दर देखी । परम रम्य सम सुभ्र विसेखी ॥
ihām̐ subela-saila raghubīrā | utare sena-sahita ati-bhīrā ||
saila-saṅga eka sundara dekhī | parama ramya sama subhra visekhī ||
6 श्लोक · 11 में से 121
इधर रघुवीर सेना सहित सुवेल पर्वत पर उतरे हैं। एक ऊँचे समतल स्थान पर लक्ष्मण अपने हाथों से कोमल पत्ते और फूल बिछाते हैं और उन पर सुन्दर मृगछाला डालते हैं, जिस पर कृपालु प्रभु विराजते हैं। प्रभु का सिर वानरराज सुग्रीव की गोद में है, बाईं ओर धनुष और दाईं ओर तरकश है। दोनों करकमलों से वे बाण सुधार रहे हैं और लंकेश विभीषण कान से लगकर सलाह दे रहे हैं। बड़भागी अंगद और हनुमान अनेक प्रकार से चरण दबा रहे हैं। पीछे लक्ष्मण वीरासन में बैठे हैं, दोहा कहता है कि धन्य हैं वे जो इस ध्यान में सदा लीन रहते हैं। प्रभु पूर्व दिशा में उदित चन्द्रमा देखकर सबसे कहते हैं कि सिंह के समान निर्भय इस चन्द्र को देखो।
इहाँ सुबेल-सैल रघुबीरा । उतरे सेन-सहित अति-भीरा ॥
सैल-सङ्ग एक सुन्दर देखी । परम रम्य सम सुभ्र विसेखी ॥
ihām̐ subela-saila raghubīrā | utare sena-sahita ati-bhīrā ||
saila-saṅga eka sundara dekhī | parama ramya sama subhra visekhī ||
तहँ तरु-किसलय-सुमन सुहाये । लछिमन रचि निज हाथ डसाये ॥
ता पर रुचिर मृदुल मृगछाला । तेहि आसन आसीन कृपाला ॥
taham̐ taru-kisalaya-sumana suhāye | lachimana raci nija hātha ḍasāye ||
tā para rucira mṛdula mṛgachālā | tehi āsana āsīna kṛpālā ||
प्रभु कृत सीस कपीस उछङ्गा । बाल दहिन दिसि चाप निषङ्गा ॥
दुहुँ कर-कमल सुधारत बाना । कह लंकेस मन्त्र लगि काना ॥
prabhu kṛta sīsa kapīsa uchaṅgā | bāla dahina disi cāpa niṣaṅgā ||
duhum̐ kara-kamala sudhārata bānā | kaha laṃkesa mantra lagi kānā ||
बड़भागी अङ्गद हनुमाना । चरन-कमल चापत विधि नाना ॥
प्रभु पाछें लछिमन बीरासन । कटि-निषङ्ग कर-बान-सरासन ॥
bar̤abhāgī aṅgada hanumānā | carana-kamala cāpata vidhi nānā ||
prabhu pācheṃ lachimana bīrāsana | kaṭi-niṣaṅga kara-bāna-sarāsana ||
एहि बिधि कृपा-सील गुन, धाम राम आसीन ।
धन्य ते नर एहिं ध्यान जे ध्यान एहि, रहत सदा लयलीन ॥
ehi bidhi kṛpā-sīla guna, dhāma rāma āsīna |
dhanya te nara ehiṃ dhyāna je dhyāna ehi, rahata sadā layalīna ||
पूरब-दिसा बिलोकि प्रभु, देखा उदित मंयक ।
कहत सबहि देखहु ससिहि, मृगपति सरिस असङ्क ॥
pūraba-disā biloki prabhu, dekhā udita maṃyaka |
kahata sabahi dekhahu sasihi, mṛgapati sarisa asaṅka ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0