लंकाकाण्ड

अध्याय 110: स्वार्थी देवताओं की स्तुति

7 श्लोक · 110 में से 121

इस अध्याय में क्या होता है

स्वार्थी देवताओं की स्तुति

प्रभु की आज्ञा पाकर मातलि रथ लेकर चला जाता है। तब सदा स्वार्थी देवता आते हैं और ऐसे वचन कहते हैं मानो परमार्थी हों। हे दयालु रघुराज, आपने देवताओं पर दया की; जगत का द्रोही यह दुष्ट अपने ही पापों से नष्ट हुआ। आप अविनाशी, निर्गुण, अजन्मा और करुणामय ब्रह्म हैं। मत्स्य, कच्छप, वराह, नृसिंह, वामन और परशुराम रूप धरकर, जब-जब देवताओं ने दुख पाया, आपने उसे मिटाया। पर देवद्रोही रावण भी आपके धाम गया, इससे हमें आश्चर्य होता है। हम स्वार्थ में लगकर आपकी भक्ति भूल गए; अब शरण आए हैं, रक्षा कीजिए। देवता हाथ जोड़े खड़े रहते हैं, और प्रेम से पुलकित ब्रह्मा स्तुति आरम्भ करते हैं।

110.1

तब रघुपति अनुसासन पाई । मातलि चलेउ चरन सिर नाई ॥
आये देव सदा स्वारथी । बचन कहहिं जनु परमारथी ॥

taba raghupati anusāsana pāī | mātali caleu carana sira nāī ||
āye deva sadā svārathī | bacana kahahiṃ janu paramārathī ||

110.2

दीन बन्धु दयाल रघुराया । देव कीन्ह देवन्ह पर दाया ॥
बिस्व द्रोह रत यह खल कामी । निज अघ गयउ कुमारग-गामी ॥

dīna bandhu dayāla raghurāyā | deva kīnha devanha para dāyā ||
bisva droha rata yaha khala kāmī | nija agha gayau kumāraga-gāmī ||

110.3

तुम्ह सम रूप ब्रह्म अबिनासी । सदा एकरस सहज उदासी ॥
अकल अगुन अज अनघ अनामय । अजित अमोघ-सक्ति करुनामय ॥

tumha sama rūpa brahma abināsī | sadā ekarasa sahaja udāsī ||
akala aguna aja anagha anāmaya | ajita amogha-sakti karunāmaya ||

110.4

मीन कमठ सूकर नरहरी । बामन परसुराम बपु धरी ॥
जब जब नाथ सुरन्ह दुख पायो । नाना तनु धरि तुम्हइँ नसायो ॥

mīna kamaṭha sūkara naraharī | bāmana parasurāma bapu dharī ||
jaba jaba nātha suranha dukha pāyo | nānā tanu dhari tumhaim̐ nasāyo ||

110.5

रावन पाप-मलिन सुर-द्रोही । काम-लोभ-मद-यस अति-कोही ॥
साउ कृपाल तव धाम सिधावा । यह हमरे मन बिसमय आवा ॥

rāvana pāpa-malina sura-drohī | kāma-lobha-mada-yasa ati-kohī ||
sāu kṛpāla tava dhāma sidhāvā | yaha hamare mana bisamaya āvā ||

110.6

हम देवता परम अधिकारी । स्वारथ-रत प्रभु भगति बिसारी ॥
नव-प्रबाहँ सन्तत हम परे । अब प्रभु पाहि सरन अनुसरे ॥

hama devatā parama adhikārī | svāratha-rata prabhu bhagati bisārī ||
nava-prabāham̐ santata hama pare | aba prabhu pāhi sarana anusare ||

दो॰ 110दोहा

करि बिनती सुर सिद्ध सब, रहे जहँ तहँ कर जोरि ।
अति सप्रेम तन पुल कि बिधि, अस्तुति करत बहोरि ॥

kari binatī sura siddha saba, rahe jaham̐ taham̐ kara jori |
ati saprema tana pula ki bidhi, astuti karata bahori ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0